स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है पर निबंध

स्वर्ग से आया एक इंसान ,

बार-बार-करता ये बयान।

धरती पर न जाना भाईजान।,

वर्ना देना पड़ेगा प्राणो का दान।

स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है पर निबंध – Long and Short Cleanliness is Next To Godliness Essay in Hindi

“स्वछता भक्ति से बढ़कर है ” जैसा कि कथन से ही स्पष्ट है स्वछता अथार्त साफ-सफाई , भक्ति अथार्त पूजा अर्चना करना।  इस प्रकार भगवान् से मिलने के प्रक्रिया में स्वछता अहम् है।  हम कोई भी हवन , पूजा , या कोई भी धार्मिक कार्य करते है तो उससे पहले स्वच्छ और शीतल जल का स्नान करते है।  इसका कारण यह है कि जब हम पूजा करें तो किसी भी प्रकार का विकार हमें आकर्षित न करे।  इसलिए स्वछता का हमारे जीवन में अत्यंत महत्व है।

स्वछता का वास्तविक अर्थ

स्वछता का अर्थ यह कदापि नहीं कि केवल अपने आस-पास स्वछता का ध्यान रखना या बल्कि मन के स्वछता का भी ध्यान रखना इसमें शामिल है।  मन की स्वछता का अर्थ है मन में सकारातमक विचारो का बहना।  यदि हम केवल शरीर को निर्मल कर ले परन्तु हमारा मन अनेक प्रकार के तुच्छ विचारो से लिप्त है तो हम स्वस्थ नहीं रह सकते।  अतः स्वछता का वास्तविक अर्थ शारीरिक , मानसिक , बौद्धिक अथवा सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ व स्वच्छ होना है।

घर की करें रोज़ सफाई

साफ करे कोना-कोना

अपने स्वास्थ्य को काहे है खोना

स्वास्थ्य है स्वर्णिम सोना

 परमात्मा से मिलन में शारीरिक स्वास्थ्य की भूमिका

यदि हम कोई भी साधना और पूजा-पाठ करते है तो उससे पहले नहाना अनिवार्य माना जाता है ताकि हमारे शरीर में उपस्थित सारी दुर्गन्ध समाप्त हो जाये और हमारा शरीर निर्मल हो जाये।  इस प्रकार नहा धोकर जब हम पूजा-पाठ करते है तो हम सांसारिक जीवन की स्थूल चीजों से स्वयं को दूर कर लेते है और वैसे भी स्नान करने के पश्चात् हर व्यक्ति अपने अन्दर एक ताज़गी का अनुभव करता है।  आत्मा का परमात्मा से मिलान जिसे योग कहा जाता है उसमे तो स्वछता का प्रमुख स्थान है।

शारीरिक स्वास्थ्य से बीमारियों से छुटकारा

यदि आप प्रतिदिन अपने आस-पास साफ़ सफ़ाई रखेंगे तो बीमारियों के शिकार नहीं होंगे।  प्रायः देखा जाता है कि एक स्वस्थ व्यक्ति अस्वस्थ व्यक्ति की तुलना में कम बीमार पड़ता है और जल्दी ही ठीक हो जाता है।  इसका कारण यह है कि स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में रोगाणुओं से लड़ने के क्षमता अत्यधिक होती है और वह कम बीमार पड़ता है।

स्वच्छ राज्य , स्वच्छ राष्ट्र और स्वच्छ देश का निर्माण

हमारे देश के प्रधानमंत्री ने भी स्वछता सम्बन्धी संकल्प को अपनाया है और इसके लिए अभियान भी चलाया है।  यदि एक राज्य स्वछता सम्बन्धी नियमो का पालन करेगा तो इसके कारण देश के अन्य राज्य सम्बंधित देश से प्रेरणा लेंगे और स्वस्छता सम्बन्धी निर्देशों का पालन करेंगे।  इस प्रकार आपके द्वारा स्वछता की तरफ उठाया गया एक कदम अन्यो के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा।

स्वछता के लिए सावधानियाँ

केवल तन की स्वछता से स्वच्छ राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है।  हमें स्वछता के और नियमों का भी पालन करना होगा जो इस प्रकार है :-

घर और पास-पड़ौस के स्वछता का ध्यान

केवल स्वयं की स्वछता रखने से स्वछता का वास्तविक सिद्धांत कायम नहीं हो सकता।  स्वछता के वास्तविक महत्व और सिद्धांत को कायम करने के लिए हमें अपने घर , पास-पड़ौस और कार्यालय को भी स्वच्छ रखना अनिवार्य है।

कभी -कभी आस-पास की अस्वछता के कारण हमें एलर्जी हो जाती है इसलिए अपने आस-पास का वातावरण भी स्वच्छ बनाये रखना अत्यन्य आवश्यक है और इसके साथ-साथ अपने कार्यालय जहाँ पर रोज कार्य करते है वह की स्वछता का भी बेहद ध्यान रखना अनिवार्य है और अपने घर में जमे हुआ मकड़ी के जालो को साफ़ करते रहना चाहिए ताकि किसी भी तरह के धूल मिटटी आपके स्वास्थ्य को नुक्सान न पहुचाये और आप और आपका परिवार एक स्वस्थ जीवन का निर्वाह कर सके। यदि कही किसी भी तरह की चिकनाई नजर आये या किसी भी प्रकार की गंदगी लगे तुरंत सफाई करनी चाहिए ताकि मछरो की भरमार न हो।

कूड़ेदान का साफ़ होना

हमें अपने घर और कार्यालय तथा आस-पास जहा भी कूड़ादान रहता है उसका प्रतिदिन साफ़ करवाना अनिवार्य है।  इसका कारण यह है कि कूड़ेदान में जमा कूड़ा वातावरण को भी प्रदूषित करता है जिसके कारण वह दूषित हवा न केवल हमें बल्कि अन्य मानव जन का जीवन भी खतरे में डाल सकती है। प्रायः  देखा जाता है जब कभी हम या हम से जुड़े अनेक लोग किसी पर्यटन स्थल पर जाते है तो कूड़ा कूड़ेदान में न डाल का वही रास्ते में ही फैक देते है जिसके कारण हमारा वातावरण दूषित हो जाता है।  और चारो तरफ मच्छरों का जमघट लग जाता है।  अतः जब कभी हम बाहर जाए तो स्वछता के नियमो का पालन अवश्य करें।

कूड़ा कर्कट मत फैलायो

पर्यावरण को स्वच्छ बनाओ

स्वछता को अपनाओ

देश अपना स्वर्ग बनाओ

शौचालय का स्वच्छ होना

एक तरफ  जहाँ हम अपने आस-पास की स्वछता का वर्णन कर रहे है वहाँ हमें शोचलाय के साफ़ सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए।  शौचालय में कीटनाशक फिनाइएल का प्रयोग करना चाहिए।

व्यक्तिगत स्वास्थ्य

हमें अपने व्यक्तिगत स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखना चाहिए।  जैसे हमारे  नाखूनों को नियमित समय  काटना चाहिये ताकि कीटाणु किसी भी  प्रकार से हमारे शरीर पर प्रहार न कर सके और न ही हमें अस्वस्थ कर सकें। व्यक्ति को प्रतिदिन साबुन और शैम्पू का प्रयोग भली भांति करना चाहिये। हमें अपने वस्त्र रोज बदलने चाहिए।  यदि हम पहले से पहने हुए कपड़ो में रहते है तो हमारे शरीर में अस्वछता का आगमन हो जाता है।  इसलिए स्वयं को स्वच्छ बनाये रखने के लिए हमें प्रतिदिन पहले से ग्रहण किये गए वस्त्रो को उतार कर , नहा-धोकर साफ-सुथरे कपड़ो को पहनना चाहिए।

आंतरिक स्वछता

शारीरिक सस्वास्थ्य के साथ-साथ हमें आंतरिक या मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए मानिसक स्वास्थ्य के अंतर्गत हमारा मन मस्तिष्क से सम्बंधित स्वास्थ्य आ जाता है।  यदि हम शारीरिक रूप से अत्यंत स्वस्थ है परन्तु हमारा मन शांत नहीं है और वह अनेक प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त है या उनके अधीन है और किसी न किसी चिंता से उसमे उथल-पुथल रहती है तो हमें अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा।  मानसिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने का एकमात्र उपाय योग करना।

योग करने से हमारा चित और मन दोनों को सुख की अनुभूति होती है और योग करने के पश्चात् हमारे अन्दर एक नई स्फूर्ति और उम्मीद का संचार होता है।  जिससे मन में उपस्थित सभी चिंताए समाप्त हो जाती हैऔर हमें मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त होता है।

प्लास्टिक का त्याग

अगर वातावरण को स्वच्छ रखना है तो हमें प्लास्टिक अथवा प्लास्टिक से बनी सभी वस्तुओ का परित्याग करना होगा।  प्लास्टिक न केवल हमारे स्वास्थ्य बल्कि समस्त मानव जाति के लिए खतरा है।

निष्कर्ष

अतः हमें अपने आस-पास स्वछता का विशेष ध्यान रखना चाहिए और दूसरों को भी इस कार्य के लिए प्रेरित करना चाहिये तभी हम एक स्वच्छ भारत का निर्माण और गाँधी जी का स्वपन पूरा कर सकते है।  जितना ज्यादा हम स्वछता को अपने जीवन का अंग बनाएंगे उतना अधिक हम दीर्धायु व्यततीत कर पाएंगे और सुखद जीवन का आंनद ले सकेंगे।