15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर निबंध - Essay On Independence Day in Hindi

भारत का स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 24 अगस्त को मनाया जाता है। सन् 1947 में इसी दिन भारत के निवासियों ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की थी। यह भारत का राष्ट्रीय त्यौहार है।

15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर निबंध – Long and Short Essay On Independence Day in Hindi

प्रतिवर्ष इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हैं । 15  अगस्त 1947 के दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने, दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के उपर, भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। महात्मा गाँधी ने नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लोगों ने काफी हद तक अहिंसक प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में हिस्सा लिया। स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश भारत को धार्मिक आधार पर विभाजित किया गया, जिसमें भारत और पाकिस्तान का उदय हुआ।

विभाजन के बाद दोनों देशों में हिंसक दंगे भड़क गऐ और साम्प्रदायिक हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं। विभाजन के कारण मनुष्य जाति के इतिहास में इतनी जादा संख्य में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ। यह संख्या तकरीबन 1.45 करोड़ थी। भारत की जनगणना 1951 के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आऐ।

इस दिन को झंडे फहराने के समारोह, परेड और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। भारतीय इस दिन अपनी पोशाक, समान, धरों और वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर इस उत्सव को मनाते हैं और परिवार व दोस्तों के साथ देशभक्ति देखते हैं, देशभक्ति के गीत सुनते हैं।

इतिहास

यूरोपीय व्यापारियों ने 17वीं सदी से ही भारतीय उपमहाद्वीप में पैर जमाना आरंभ कर दिया था। अपनी सैन्य शक्ति में बढ़ोतरी करते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी ने 18वीं सदी के अंत तक स्थानीय राज्यों को अपने वशीभूत कर के अपने आप को स्थापित कर लिया था। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत सरकार अधिनियम 1858 के अनुसार भारत पर सीधा अधिपत्य ब्रितानी ताज ( ब्रिटिश क्रउन ) अर्थात ब्रिटेन की राजशाही का हो गया।

दशकों बाद नागरिक समाज ने धीरे धीरे अपना विकास किया और इसके परिणाम स्वरूप 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ( आईo एनo सीo ) निर्माण हुआ। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद का समय ब्रितानी सुधारों के काल के रूप में जाना जाता है। जिसमें मोटेंगू-चेम्सफोर्ड सूधार गिना जाता है लेकिन इसे भी रोलेट एक्ट की तरह दबाने वाले अधिनियम के रूप में देखा जाता है जिसके कारण स्वरूप भारतीय समाज सुधारको द्वारा स्वशासन का आवाहन किया गया। इसके परिणामस्वरूप महात्मागाँधीके नेतृत्व में असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों तथा राष्ट्रव्यापी अहिंसक आंदोलनों की शुरूआत हो गई।

1930 के दशक के दौरान ब्रितानी कानूनों में धीरे धीरे सुधार जारी रहे. परिणामी चुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की।अगला दशक काफी राजनीतिक उथल पुथल वाला रहा; द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत की सहभागिता, कांग्रेस द्वारा असहयोग का अंतिम फैसला और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग द्वारा मुस्लिम राष्ट्रवाद का उदय। 1947 में स्वतंत्रता के समय तक राजनीतिक तनाव बढ़ता गया। इस उपमहाद्वीप के आन्नदोत्सव का अंत भारत और पाकिस्तान के विभाजन के रूप में हुआ।

स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन ट्रिस्ट विद डेस्टिनी ( नियती से वादा ) नामक अपना प्रसिद्ध भाषण दिया:

“कई सालों पहले, हमने नियति से एक  वादा किया था, और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभायें, पूरी तरह न सही पर बहुत हद तक तो निभाएँ। आधी रात के समय, जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा। ऐसा क्षण आता है, मगर इतिहास में विरले ही आता है, जब हम पुराने से निकल नए युग में कदम रखते हैं, जब एक युग समाप्त हो जाता है, जब एक देश की लम्बे समय से दबी हुई आत्मा मुक्ति होती है। यह संयोग ही है कि इस पवित्र अवसर पर हम भारत और उसके लोगों की सेवा करने के लिए तथा सबसे बढकर मानवता की सेवा करने के लिए समर्पित होने की प्रतिज्ञा कर रहे हैं।

आज हम दुर्भाग्य के एक युग को समाप्त कर रहे हैं और भारत पुनः स्वंय को खोज पा रहा है। आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, ओ केवल एक कदम है, नए अवसरों के खुलने का। इससे भी बड़ी विजय और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही है। भारत की सेवा का अर्थ है लाखों-करोड़ों पीड़ितों की सेवा करना। इसका अर्थ है निर्धनता, अज्ञानता, और अवसर की असमानता मिटाना। हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही इच्छा है कि हर आंख से आंसू मिटे।

संभवतः ये हमारे लिए संभव न हो पर जब तक लोगो कि आंखो में आंसू है, तब तक हमारा कार्य समाप्त नहीं होगा। आज एक बार फिर वर्षों के संघर्ष के बाद, भारत जागृत और स्वतंत्र है। भविष्य हमें बुला रहा है। हमें कहाँ जाना चाहिए और हमें क्या करना चाहिए, जिससे हम आम आदमी, किसानों और श्रमिकों के लिए स्वतंत्रता और अवसर ला सकें,हम निर्धनता मिटा, एक समृद्ध, लोकतंत्रिक और प्रगतिशील देश बना सकें। हम ऐसे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं को बना सके जो प्रत्येक स्त्री-पुरुष के लिए जीवन की परिपूर्णता और न्याय सुनिश्चित कर सके। कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके लोगों की सोच या कर्म संकीर्ण है।

स्वतंत्रता दिवस

भारत का स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्त को देश भर में हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह प्रत्येक भारतीय को एक नई शुरूआत की याद दिलाता है। इस दिन 200 वर्ष से अधिक समय तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद के चंगुल से छूट कर एक नई युग की शुरूआत हुई थी। 15 अगस्त 1947 वह भाग्यशाली दिन था जब भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्वतंत्र घोषित किया गया और नियंत्रण की बागडोर देश के नेताओं को सौंपा दि गई। भारत द्वारा आजादी पाना उसका भाग्य था, क्योंकि स्वतंत्रता संघर्ष काफी लम्बे समय चला और यह एक थका देने वाला अनुभव था, जिसमें अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन कुर्बान कर दिये।