एक कस्टम आफिसर का मुख्य कार्य देश के आयात -निर्यात पर नियंत्रण करना होता है और साथ ही साथ उसकी शुद्धता को भी ध्यान में रखना होता है। उसको इस बात का भी ध्यान रखना होता है देश के अंदर कोई भी सामान गैर क़ानूनी तरीके से तो नहीं आ रहा या देश से बाहर कोई भी सामान गैर क़ानूनी तरीके से देश के बाहर तो नहीं जा रहा है।
इस प्रकार इस पद पर बहुत अधिक जिम्मेदारियाँ होती है और एक कस्टम ऑफिसर को अपने पद की निष्ठा और विश्वसनीयता बनाये रखने के उम्मीद की जाती है। इसके अतिरिक्त उसे इस बात का भी ध्यान रखना होता है कि देश में किसी भी तरह की कोई सम्गलिंग अथवा तस्करी जैसी गतिविधियाँ तो नहीं हो रही है , यदि इस प्रकार की कोई गतिविधि देश की सीमा के अंदर पाई जाये तो उसे तुरंत ऐसी गतिविधियों को रोकना चाहिए।
Custom Officer कैसे बने? (Custom Officer Kaise Bane)
यदि आप कस्टम अफसर बनना चाहते है तो आपको यूपीएससी द्वारा आयोजित होने वाली सिविल सर्विस की परीक्षा को उतरीं करना होगा , यदि आप इस परीक्षा को पास कर लेते है तो आपको कस्टम विभाग में आईआरएस के पद की प्राथमिकता दे सकते हैं। विभिन्न प्रकार के नागरिक सेवाओं की भर्ती के लिए यूपीएससी की परीक्षा देनी होती हैं जो अन्य एंट्रेंस एग्जाम से ज्यादा कठिन होती है. इसमें आईएस , आईपीएस , आईआरएस के पद शामिल हैं।
इस पद के लिए लिखित और मौखिक दो परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं , इन परीक्षाओं में जो कैंडिडेट सेलेक्ट होते हैं उन्हें आगे प्रशिक्षण के लिया चेन्नई भेजा जाता है , चेन्नई भेजे जाने वाले कैंडिडेट वही होते हैं जिन्होंने कस्टम ऑफिसर के अवदान के लिए परीक्षा दी है और यदि किसी कैंडिडेट ने केंद्रीय उत्पाद से सबंधित सेवा के लिए आवेदन किया होता है तो उसे आगे की परीक्षा के लिया मेट्रोपोलिटन शहरो में भेजा जाता है।
योग्यता
आप एक कस्टम ऑफिसर के परीक्षा के लिए आवेदन ग्रेजुएट होना अनिवार्य है , और उसमे आपके 55% अंको का होना भी आवश्यक है।
सिविल सर्विस ऍप्टीट्यूड टेस्ट में दो पेपर शामिल हैं. प्रत्येक पेपर में अधिकतम 200 अंक होते हैं. प्रश्न ऑब्जेक्टिव टाइप के होते हैं. इस पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वर्तमान घटनाक्रम, भारत का इतिहास, भूगोल, आर्थिक और सामाजिक विकास, पर्यावरण पारिस्थितिकी, सामान्य विज्ञान, तार्किक तर्क और विश्लेषणात्मक क्षमता और अंग्रेजी भाषा की समझ के कौशल पर सामान्य मुद्दे शामिल होते हैं.
इसके अंतर्गत निम्न परीक्षाएं होती हैं :-
- सीएसटी – इसमें दो पेपर होते हैं , हर पेपर 200 अंको का होता है , प्रश्न ऑब्जेक्टिव टाइप के होते हैं , जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय व् अंतराष्ट्रीय समस्याएँ , घटनाक्रम , भारतीय इतिहास ,भूगोल , आर्थिक और सामाजिक विकास , तर्क सबंधी प्रश्न , भाषा सम्बन्धी प्रश्न आदि सम्मिलित हैं। सीएसटी का पूरा नाम सिविल सर्विस एप्टीटुड है।
- मुख्य परीक्षा :– सीएसटी की परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा होती है , जिसमे कैंडिडेट को नौ पेपर देने होते हैं , ये पेपर वर्णात्मक अथवा निबनधत्मक हो सकते हैं , जिसके द्वारा उम्मीदवार के बौद्धिक ज्ञान को परखा जाता है कि उसे विषय से सबंधित ज्ञान की कितनी नॉलेज है ।
- व्यक्तित्व परिक्षण :- व्यक्तित्व परीक्षण के अंतर्गत व्यक्ति का साक्षात्कार लिया जाता है , उसकी विशेषताएं , गुणों , बौद्धिक ज्ञान , नैतिक मूल्यों को परखा जाता है।
कस्टम ऑफिसर की भर्ती के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखा गया है :-
- शारीरक स्थिति :- इसके अंतर्गत आपकी शारीरिक स्थिति जैसे आपका कद , छाती आते हैं। इस पद के आवेदन के लिए आपकी ऊंचाई5 cm और छाती 81cm होनी चाहिए।
- आयु :- इसके अवदान के लिए आपकी आयु 28वर्ष से कम होनी चाहिए।
- योग्यता :- इसके अंतर्गत आपका ग्रेजुएट होना जरुरी है।
- परीक्षा :- आपको यूपीएससी या एमपीएससी में से किसी एक परीक्षा में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
वेतन
इसका वेतन 42,000 के लगभग होता है , जिसमे इसके आलावा अधिकारी को अनेक प्रकार के भत्ते भी सरकार द्वारा प्रदान किए जाते है , जैसे महालाभ , PF फैसिलिटी , स्वास्थ्य बीमा , पेंशन जोकि उसी की सैलरी का हिस्सा होता है , रिटायरमेंट के बाद या नौकरी करते समय उसके लाभ दिए जाते हैं। इन् सब लाभों को अधिकारी की सैलरी में से काट के उसको वेतन दिया जाता है। धीरे-धीरे इस वेतन में वृद्धि होती रहती है।
एक कस्टम ऑफिसर में निम्न गुणों का होना आवश्यक है :-
- उसे भारत का नागरिक होना चाहिए।
- उसके पास ड्राइविंग लिएसेन्स होना चाहिए।
- उसे ओड टाइम और ओवर टाइम की भी आदत होनी चाहिए।
- उसे कंप्यूटर की भी नॉलेज होनी चाहिए।
- वह किसी भी प्रकार का नशा न करता हो।
- उसमे निर्णय लेने की क्षमता और परिस्थिति या समस्या को हल करने की शमता होनी चाहिए।
कस्टम अधिकारी के कार्य
1962 में कस्टम से सम्बंधित एक कानून बनाया गया , जोकि कस्टम ड्यूटी से सम्बंधित है और इसके आधार पर कस्टम ड्यूटी भी निर्धारित की गई थी जोकि एक प्रकार का कर है जोकि सरकार द्वारा इकठ्ठा किया जाता है। ऐसा अनुमान है कि सरकार को कर से सबंधित राशि में इस कर का भाग 17 से 18 % होता है।
कस्टम ड्यूटी के लाभ
कस्टम ड्यूटी के कारण देश में गैर क़ानूनी कार्यो को रोका जा सकता है , यदि कोई व्यक्ति गैर क़ानूनी तरीके से देश में आयात -निर्यात करता है या स्मगलिंग करता है तो उसके लिए उसे दंडित किया जाता है , और कस्टम ड्यूटी भी देनी पड़ती है। कस्टम ड्यूटी में मुख्त देश से बाहर होने वाले आयात निर्यात को परखा जाता है।
