केरल पर निबंध - Essay on Kerala in Hindi

आज हम इस पोस्ट में केरल पर निबंध (Essay on Kerala in Hindi) के द्वारा केरल राज्य के बारे में विस्तार से जानने की कोशिस करेंगे।केरल भारत के दक्षिणी भाग में एक राज्य है जाे 1 नवंबर 1956 काे इसका गठन किया गया। केरल की राजधानी तिरुवनन्तपुरम हैं। केरल के पड़ाेसी राज्य कर्नाटक और तमिलनाडु हैं। केरल के दक्षिण में हिन्द महासागर और पश्चिम में अरब सागर हैं।

तिरुवनन्तपुरम केरल का सबसे बड़ा शहर है। केरल में मलयालम और अंग्रेजी बाेली जाती है लेकिन मुख्य भाषा मलयालम हैं। यहा पर हिन्दु और मुसलमानाें के अलावा ईसाई धर्म के लाेग काफी बड़ी संख्या में रहते हैं। केरल की साक्षरता दर भारत में सबसे अधिक है तथा शिशु मृत्यु दर देश में सबसे कम हैं। जिसकी वजह से केरल काे शिक्षित राज्य का दर्जा प्राप्त हैं। तो चलिए केरल पर निबंध (Essay on Kerala in Hindi) के जरिये इनके बारे में अच्छे से जानते है।

केरल पर निबंध – Essay on Kerala in Hindi

केरला का इतिहास काफी पुराना है माना जाता है कि केरल में 10वीं सदी ईसा पूर्व से मानव के बसने के प्रमाण मिले हैं केरल भारत के दक्षिण-पश्चिम भाग में स्थित हैं केरल में प्राचीन काल से ही बंदरगाह थे जिसके कारण विदेशी व्यापार समृद्ध हुआ और विदेशों के साथ व्यापार संबन्ध के कारण यहाँ पर ईसाई और इस्लाम धर्म प्रचलित हुआ।

स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व केरल में राजाओं की रियासतें थीं। तिरुकोच्चि राज्य का गठन जुलाई 1949 में तिरुवितांकूर और कोच्चिन को जोड़कर किया गया। और नवंबर 1956 में तिरुकोच्चि के साथ मलाबार को भी जोड़ा गया तथा इस तरह से वर्तमान केरल की स्थापना हुई। केरल काे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व का प्रथम शिशु सौहार्द राज्य (Baby Friendly State) हैं।

केरल राज्य का भूगोल

केरल काे भौगोलिक दृष्टि से कई क्षेत्रों में विभक्त किया जाता है – पर्वतीय क्षेत्र, मध्य क्षेत्र, समुद्री क्षेत्र आदि। केरल का क्षेत्रफल 38,863 वर्ग किमी है केरल के पूर्वी क्षेत्र में उँचे पहाड़, नाले और घाटियाँ है।

केरल राज्य से 41 पश्चिम की ओर और 3 पूर्व की ओर नदियाँ निकलती है। केरल का तटीय बेल्ट लगभग सपाट है और इसमें कई नहरों, झीलों और नदियों का बड़ा नेटवर्क है जिसे केरल का बेकवाॅटर कहा जाता है। केरल को ‘ईश्वर का अपना घर‘ (God’s Own Country) कहा जाता है। केरल विश्व भर में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना रहा है

अर्थव्यवस्था

यह कहना सही नहीं है कि केरल की अर्थव्यवस्था सिर्फ कृषि अधारित है। केरल के आर्थिक विकास का उल्लेख न तो प्राथमिक क्षेत्र (कृषि उद्योग) है और न ही विभिन्न उत्पादन-निर्माण से शामिल उद्योग क्षेत्र है। बल्कि आर्थिक विकास का मुख्य सेवा क्षेत्र हैं। केरल की आमदनी तथा रोज़गार का अधिकांश भाग सेवा क्षेत्र से प्राप्त होता है।

केरल की उर्वर मिट्टी, नदी तट क्षेत्र, झीलें आदि मछली उत्पादन, चावल, नारियल तथा साग – सब्जियों की खेती के लिए लाभदायक है। पर्वतीय एवं समुद्र तटीय क्षेत्रों के बीच के प्रदेशों में नारियल, चावल, सुपारी के पेड़, काजू के पेड़, रबड़, कालीमिर्च, अदरक आदि की खेती होती है।

मसालों में काली मिर्च सबसे मुख्य उत्पाद है और केरल इसका सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। पूर्वी पहाडी क्षेत्र में कॉफी, चाय, रबड़ की खेती औपनिवेशिक काल से चलती चली आ रही है। 20वीं सदी के मध्य में पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र में काफी वृद्धि हुई इससे केरल की आर्थिक व्यवस्था विकसित हुई।

त्यौहार और उत्सव

केरल में अनेक त्याैहार और उत्सव मनाये जाते हैं ओणम केरल का मुख्य उत्सव है जाे फसल के काटने पर मनाया जाता है इसके अलावा प्रमुख हिन्दू त्योहाराें में विषु, नवरात्रि, दीपावली, शिवरात्रि, तिरुवातिरा आदि और मुसलमानाें में रमज़ान, बकरीद, मुहरम, मिलाद-ए-शरीफ आदि तथा ईसाई क्रिसमस, ईस्टर आदि त्याैहार और उत्सव मनाये जाते हैं।

कला और समाज

केरल की कलाओ की परंपरा सदियों पुरानी हैं। इसके इतिहास का प्रथम काल 1000 ई0 पूर्व से 300 ई0 तक माना जाता है। केरल की कलाओं को दो भागाे में बाटा जा सकते हैं – एक दृश्य कला और दूसरी श्रव्य कला। दृश्य कला के अंतर्गत – रंगकलाएँ, अनुष्ठान कलाएँ, चित्रकला और सिनेमा आते हैं। श्रव्य कला के अंतर्गत – संगीत, सार, फिल्म, प्रदर्शन और प्रतिष्ठानों।

केरल की मातृभाषा मलयालम है यहाँ आर्य, अरबी, यहूदी तथा मिश्रित वंश के लोग भी रहते हैं। दूसरा प्रमुख वर्ग आदिवासियों का है। ये सभी वर्ग मिल जुलकर आधुनिक केरल के समाज का निर्माण करते हैं। केरल के प्रमुख धर्म – हिन्दू, ईसाई और इस्लाम धर्म हैं। शिक्षा, साक्षरता और स्वास्थ्य के मामलाे में केरल का समाज भारत का सबसे उन्नत समाज माना जाता है।

केरल के १४  जिले

  1. वायनाड
  2. त्रिशूर
  3. तिरुअनंतपुरम
  4. पथानामथिट्टा
  5. पलक्कड़
  6. मलप्पुरम
  7. कोझीकोड
  8. कोट्टायम
  9. कोल्लम
  10. कासरगोड
  11. कन्नूर
  12. इडुक्की
  13. एरनाकुलम
  14. अलाप्पुझा

केरल का यातायात साधन

केरल का परिवहन बहुत ही विकसित हैं। यह देश का पहला राज्‍य है जहाँ के गांवों तक सड़कें मौजूद हैं। केरल राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों से जुड़ा हुआ है। यहाँ के तीन प्रमुख बंदरगाह – कोषिकोड, कोच्चि-एर्णाकुल और आलप्पुषा हैं। केरल में तीन प्रमुख हवाई अड्डा है – तिरुवनंतपुरम, कोषिकोड और कोच्चि हैं। यहा पर एक बड़ा बंदरगाह कोच्चि में है और 17 अन्य छोटे बंदरगाह है।

केरल का भाेजन

केरल का भाेजन शाकाहारी और मांसाहारी दोनों के लिए समान रूप से खाये जाते है। केरल के इतिहास में मसाले हमेशा से बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं। केरल के सभी समुदायों के लिए चावल मुख्य आहार है। काली मिर्च युक्त कंजी से लेकर मलबार बिरियानी तक हमारे यहां बेहतरीन राइस रेसिपी उपलब्ध हैं। आप जब भी जाए यहा के खाने का आनंद जरूर ले।

केरल में पर्यटन स्थल

केरल राज्य पर्यटकों के लिए बहुत लोकप्रिय स्थल रहा है केरल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा हैं। इस लिए इसे ‘ईश्वर का अपना घर‘ नाम से जाना जाता है। और यहाॅ पर पूरी दुनिया से लाेग भ्रमण करने आते हैं।

केरल में सभी धर्माे के स्थल मिलेगे क्याेकिं यहा सभी धर्म के लाेग मिल-जुलकर रहते हैं। यहा पर अनेक मंदिरे, मस्जिदें, चर्च, जलप्रपात, बीच, आदि धूमने वाली जगहें हैं जैसे – अनंतपुरा झील मंदिर, अतिराप्पिल्ली जलप्रपात, चूटाड बीच, नीलिमला व्यूपॉइंट, एडक्कल गुफाएं आदि।

1. अनंतपुरा झील मंदिर

अनंतपुरा का झील मंदिर केरल के उत्तरी सिरे पर स्थित है केरल का एकमात्र झील मंदिर हैं। यह आयताकार झील है, जिसमें नियमित रूप से चस्मे का पानी आता है यह भगवान अनंतपद्मनाभ का मूल स्थान माना जाता है जो तिरुवनंतपुरम के प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के देवता हैं। मंदिर से पहाड़ियों का नजारा बहुत ही सुंदर दिखाई देता है।

बबिया, शाकाहारी मगरमच्छ और मंदिर के संरक्षक, यहां आने वाले श्रद्धलुओं में बहुत लोकप्रिय हैं। मंदिर जाने के लिए यात्रा भी बेहद शांतिदायक और प्रसन्नतापूर्ण है।

2. अतिराप्पिल्ली जलप्रपात

अतिराप्पिल्ली जलप्रपात केरल का सबसे प्रसिद्ध और सबसे बड़ा जलप्रपात है। जाे 80 फीट की ऊंचाई से गिरता हैं। जमीन पर गिरते पानी का दृश्य आपको कुदरत की ताकत व भव्यता पर हैरानी से भर देता है।

ये जलप्रपात न केवल अपनी खूबसूरती बल्कि आस-पास के घने वनों में पाई जाने वाली विशिष्ट प्रजातियों के लिए भी प्रसिद्ध है। बाहर के लोगों के लिए एक सदाबहार पिकनिक स्थल है। इसके आसपास की हरियाली यहां घूमने और अपने प्रियजनों के साथ पिकनिक मनाने के लिए मुफीद है।

3. चूटाड बीच

चूटाड बीच केरल के समुद्र तट पर स्थित हैं जाे कि बहुत ही खुबशुरत हैं। पेड़ों की पृष्ठभूमि के साथ सूर्य, रेत और समुद्र का सामना करने वाला बीच समुद्र तटों के सबसे आकर्षक में से एक है और यह कन्नूर में पझायंगादी शहर से कुछ किलोमीटर दूर हैं। जाे शांति और एकांत की तलाश करने वालों के लिए आदर्श स्थान है। यहाँ पर एक बीच पार्क और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

समुद्र तट के पास की नदी में पैडल बोट और स्पीड बोट के लिए भी सुविधाएं हैं। पेड़ों के बीच में टहलने से सुखदायक हवा के साथ बैठने और आराम करने के लिए एक सुविधा मिलती है।

4. नीलिमला व्यूपॉइंट

नीलिमला व्यूपॉइंट देखने के लिए वायनाड की ओर ड्राइव करने के दौरान कई ऐसे अद्भुत नज़ारे मिलते हैं, जो नीचे की वादियों की दिलकश चित्र पेश करती हैं। नीलिमला व्यूपॉइंट इस जिले का सबसे ऊंचा स्थान है।

जिस कारण से यहां बड़ी तादाद में सैलानी खिंचे चले आते हैं। बादल यहाँ आपके काफी निकट दिखाई पड़ते हैं और इस स्थान से घाटी अनंत दूरी तक फैली दिखाई पड़ती है। धुंध में लिपटी पहाड़ी ढालें और विशाल चट्टाने आपको खूब लुभाती हैं ह स्थान आज एक बेहद लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट बन गया है।

केरल की संस्कृति हज़ारों साल पुरानी है। इसके इतिहास का प्रथम काल 1000 ईं. पूर्व से 300 ईस्वी तक माना जाता है। अधिकतर महाप्रस्तर युगीन स्मारिकाएँ पहाड़ी क्षेत्रों से प्राप्त हुई। अतः यह सिद्ध होता है कि केरल में अतिप्राचीन काल से मानव का वास था। केरल में आवास केन्द्रों के विकास का दूसरा चरण संगमकाल माना जाता है। यही प्राचीन तमिल साहित्य के निर्माण का काल है। संगमकाल सन् 300 ई. से 800 ई तक रहा। प्राचीन केरल को इतिहासकार तमिल भूभाग का अंग समझते थे। सुविधा की दृष्टि से केरल के इतिहास को प्राचीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक कालीन – तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं।

  • प्राचीन केरल
  • मध्यकालीन केरल
  • आधुनिक केरल

Essay on Kerala in Hindi: केरल की भाषा मलयालम है जो द्रविड़ परिवार की भाषाओं में एक है। मलयालम भाषा के उद्गम के बारे में अनेक सिद्धान्त प्रस्तुत किए गए हैं। एक मत यह है कि भौगोलिक कारणों से किसी आदि द्रविड़ भाषा से मलयालम एक स्वतंत्र भाषा के रूप में विकसित हुई। इसके विपरीत दूसरा मत यह है कि मलयालम तमिल से व्युत्पन्न भाषा है। ये दोनों प्रबल मत हैं।

सभी विद्वान यह मानते हैं कि भाषाई परिवर्तन की वजह से मलयालम उद्भूत हुई। तमिल, संस्कृत दोनों भाषाओं के साथ मलयालम का गहरा सम्बन्ध है। मलयालम का साहित्य मौखिक रूप में शताब्दियाँ पुराना है। परंतु साहित्यिक भाषा के रूप में उसका विकास 13 वीं शताब्दी से ही हुआ था। इस काल में लिखित ‘रामचरितम्’ को मलयालम का आदि काव्य माना जाता है।

उम्मीद करता हु आपको केरल पर निबंध (Essay on Kerala in Hindi) के माध्यम से केरल के बारे में विशेष जानकारी मिल गयी होगी। अगर आप कुछ पूछना या जानना चाहते है, तो आप हमारे फेसबुक पेज पर जाकर अपना सन्देश भेज सकते है। हम आपके प्रश्न का उत्तर जल्द से जल्द देने का प्रयास करेंगे। इस पोस्ट को पढने के लिए आपका धन्यवाद!