इस पोस्ट में जेम्स वाट का जीवन परिचय (James Watt Biography in Hindi) पर चर्चा करेंगे। जेम्स वाट एक ऐसे आविष्कारक थे जो वैज्ञानिक तथा अभियान्त्रिकी क्षेत्र की समन्वित क्षमता के धनी व्यक्ति थे । जेम्स वाट ने जो वाष्प इंजन सम्बन्धी खोज की, उससे संसार को ऊर्जा तथा ऊष्मा की क्षमता का परिचय हुआ । औद्योगिक क्रान्ति लाने में वाट की यह खोज महान एवं उपयोगी साबित हुई है ।
उदाहरण 1. जेम्स वाट का जीवन परिचय – James Watt Biography in Hindi
जेम्स वाट का जन्म 19 जनवरी 1736 को क्लाईड की संकरी खाड़ी में ग्रीनोक्क बंदरगाह पर हुआ था। उनके पिता जहाज के मालक और ठेकेदार थे और साथ ही गाँव के मुख्य बेली (Baillie) भी थे, जबकि उनकी माता एग्नेस मुईरहेड, एक अच्छी पढ़ी-लिखी महिला था जिसका संबंध एक टूटे हुए परिवार से था।
उनके माता और पिता दोनों ही पादरी संघ शासित गिरजे के सदस्य थे। वाट के दादा, थॉमस वाट गणित के शिक्षक और बेली (Baillie) थे। धार्मिक माता-पिता के हातो बड़े होने के बावजूद बाद में वे Adeist बने थे।
वाट रोजाना स्कूल भी नही जाते थे, शुरू में उनकी माँ ही उन्हें घर पर पढ़ाती थी लेकिन बाद में उन्होंने ग्रीनोक्क ग्रामर स्कूल जाना शुरू किया। स्कूल के दिनों में उन्होंने निपुणता से अपने इंजीनियरिंग गुणों और गणित के गुणों का प्रदर्शन किया था, लेकिन लैटिन और ग्रीक भाषा में उनकी ज्यादा रूचि नही थी।
जब वे 18 साल के थे तभी उनकी माता की मृत्यु हो गयी थी और इसके बाद उनके पिता की सेहत भी ख़राब होती गयी। बाद में उपकरणों का अभ्यास करने के लिये उन्होंने लन्दन (London) की यात्रा की और फिर स्कॉटलैंड वापिस आ गये।
ग्लासगो में बहुत से आर्थिक शहरो की यात्रा करने के बाद उन्होंने खुद का उपकरण बनाने का व्यवसाय शुरू करने की ठानी। वहाँ वे पीतल के वृत्तपाद, समांतर मापक, स्केल, टेलिस्कोप के कुछ अंग और बैरोमीटर बनाने और उनके ठीक करने का काम करने लगे।
सात सालो तक शिक्षार्थी बनकर सेवा ना करने की वजह से ग्लासगो से उनके एप्लीकेशन को ब्लॉक किया गया, स्कॉटलैंड में उनके अलावा और दूसरा कोई भी उपकरण बनाने वाला इंसान नही था।
वाट को बचपन से हमेशा वाष्प की क्षमता जानने की उत्सुकता रहती थी| वह वाष्प के ऊपर प्रयोग करता रहता और वाष्प से सम्बन्धित अपनी मान्यताएं स्थापित करता रहता| वर्ष 1764 कि बात है न्यूकोमेन जो कि वाष्प के इंजन के पहले अविष्कारक थे उन्होंने वाट को अपने इंजन का नमूना मरम्मत के लिए दिया|
उस इंजन की मरम्मत करते समय वाट के दिमाग यह बात आई कि इस इंजन में वाष्प आवश्यकता से अधिक खर्च होती है| उसने यह भी विचार किया कि वाष्प की इस बर्बादी का कारण इंजन के बॉयलर का अपेक्षाकृत छोटा होना है|
अब वाट ऐसे इंजन के निर्माण में लग गया जिसमे वाष्प कि खपत कम से कम हो और वाष्प बर्बाद न हो| वाष्प इंजन के इस समाधान के लिए वह 1 वर्ष तक जूझता रहा| और आखिरकार 1765 में इस समस्या का समाधान उसके हाथ में लग गया।
इस समस्या का हल था कि एक पृथक कंडेसर का निर्माण करना| वाट ने विचार किया कि बॉयलर से एक पृथक कंडेसर हो और उसको बॉयलर के साथ भी जुडा होना चाहिए| इस तरह न्यूकेमोन के वाष्प इंजन में सुधार करके नए वाष्प इंजन का निर्माण जेम्स वाट (James Watt Biography in Hindi) का प्रथम और महानतम आविष्कार था|
भाप में कैसी ताकत होती है और उस ताकत को दूसरी चीज़ों को चलाने और घुमाने में कैसे लगाया जाए, जेम्स वाट नामक वह स्कॉटिश बालक कई दिनों तक सोचता रहा. केतली की नली के आगे तरह-तरह की चरखियां बनाकर उसने उन्हें घुमाया और थोड़ा बड़ा होने पर उनसे छोटे-छोटे यंत्र भी चलाना शुरू कर दिया.
युवा होने पर तो वह अपना पूरा समय भाप की शक्ति के अध्ययन में लगाने लगा अगर हम इस शक्ति को काबू में करके इससे अपने काम करना सीख लें तो हम इतना कुछ कर सकते हैं जो कोई सोच भी नहीं सकता.
ये सिर्फ भारी वजन ही नहीं उठाएगी बल्कि बड़े-बड़े यंत्रों को भी गति प्रदान करेगी. ये विराट चक्कियों को घुमाएगी और नौकाओं को चलाएगी. ये चरखों को भी चलाएगी और खेतों में हलों को भी धक्का देगी. हजारों सालों से मनुष्य इसे प्रतिदिन खाना बनाते समय देखता आ रहा है लेकिन इसकी उपयोगिता पर किसी का भी ध्यान नहीं गया.
लेकिन भाप की शक्ति को वश में कैसे करें, यही सबसे बड़ा प्रश्न है”. एक के बाद दूसरा, वह सैकडों प्रयोग करके देखता गया. हर बार वह असफल रहता लेकिन अपनी हर असफलता से उसने कुछ-न-कुछ सीखा. लोगों ने उसका मजाक उड़ाया – “कैसा मूर्ख आदमी है जो यह सोचता है कि भाप से मशीनें चला सकता है!” लेकिन जेम्स वाट (James Watt Biography in Hindi) ने हार नहीं मानी.
कठोर परिश्रम और लगन के फलस्वरूप उन्होंने अपना पहला स्टीम इंजन बना लिया. उस इंजन के द्वारा उन्होंने भांति-भांति के कठिन कार्य आसानी से करके दिखाए. उनमें सुधार होते होते एक दिन भाप के इंजनों से रेलगाडियां चलने लगीं.
लगभग 200 सालों तक भाप के इंजन सवारियों को ढोते रहे और अभी भी कई देशों में भाप के लोकोमोटिव चल रहे हैं. वर्ष 1782 में वाट ने दोहरा कार्य करने वाले इंजन का आविष्कार किया| इस इंजन के लिए उसने विशेषाधिकार पत्र प्राप्त कर लिया| इस इंजन का पिस्टन दोनों कार्य करता था- आगे की और धकेलता था और पीछें की और खींचता था|
इन इंजन से कार्य लेने के लिए यह आवश्यक था कि पिस्टन को बीम के साथ जोड़ा जाए ताकि बीम हिल डुल न सके| उन्हें गुप्त ताप की खोज की घटना के बाद भाप सम्बन्धी शक्ति का ध्यान हो आया।
उन्हीं दिनों विश्वविद्यालय में एक धीरे-धीरे काम करने वाला अधिक ईधन लेने वाला एक इंजन मरम्मत के लिए आया। जेम्स ने इसे सुधारने का बीड़ा उठाया और उन्होंने उसमें लगे भाप के इंजन में एक कण्डेन्सर लगा दिया, जो शून्य दबाव वाला था, जिसके कारण पिस्टन सिलेण्डर के ऊपर नीचे जाने लगा। पानी डालने की जरूरत उसमें नहीं थी।
1764 में उन्होंने मार्गरेट मिलर से शादी कर ली और उन्हें पाँच बच्चे भी हुए, लेकिन उनमे से दो ही युवावस्था तक जीवित रह सके : जेम्स जूनियर (1769-1848) और मार्गरेट (1767-1796)। उनकी पत्नी 1772 में एक बच्चे हो जन्म देते हुए मृत्यु हो गयी थी।
1777 में उन्होंने दोबारा एन्न मैकग्रेओर से शादी कर ली, जो ग्लासगो डाई-मेकर (Dye-Maker) की बेटी थी। उनसे उन्हें दो बच्चे हुए : पहले ग्रेगोरी (1777-1804) जो भूवैज्ञानिक और खनिज विज्ञानी थे और दुसरे बेटे जेनेट (1779-1794) थे। जेम्स वाट 83 वर्ष की उम्र मे इस दुनिया से अलविदा कर गये।
शून्य की स्थिति बनाये रखने के लिए जेम्स ने उसमें एक वायुपम्प लगाकर पिस्टन की पैकिंग मजबूत बना दी। घर्षण रोकने के लिए तेल डाला तथा एक रटीम टाइट बॉक्स लगाया, जिससे ऊर्जा की क्षति रुक गयी।
इस तरह वाष्प इंजन का निर्माण करने वाले जेम्स वाट (James Watt Biography in Hindi) पहले आविष्कारक बने अपने इंजन में और सुधार करते हुए जेम्स ने इसे खदानों से पानी निकालने के लिए भी काम में लिया । 1790 तक जेम्स वाट एक धनवान् व्यक्ति बन गये थे । जेम्स ने अपने भाप के इंजन में समय-समय पर बहुत से सुधार किये । उन्होंने सेंट्रीपयूगल गवर्नर लगाकर घूमते इजन की गति को नियन्त्रित किया ।
भाप के दबाव को दर्ज तथा आयतन के अनुपात को दर्ज करने के लिए एक ऐसा संकेतक बनाया, जिसे थर्मोडायनामिक्स कहते हैं । जेम्स वाट (James Watt Biography in Hindi) को उनकी खोजों के लिए रॉयल्टी के तौर पर 76 हजार डॉलर पेटेन्ट से मिले ।
धनवान व्यक्ति बनने के बाद उन्होंने अपना व्यापार बच्चों के हाथ सौंप दिया । उनकी रुचि चित्र बनाने में भी थी । जीवनकाल में उन्हें 1800 में ग्लोरको विश्वविद्यालय ने डॉक्टर ऑफ लौज की मानद उपाधि प्रदान की ।
1814 में विज्ञान अकादमी ने उन्हें सम्मानित किया । वृद्धावस्था में उन्हें राजनीतिक विरोधों के साथ-साथ कई पारिवारिक दुःखों का सामना करना पड़ा । उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में पूरे आकार की पाषाण प्रतिमाएं बनाने की मशीन का आविष्कार किया था । अन्तिम समय तक विपुल सम्पत्ति के स्वामी जेम्स वाट शोध में लगे रहे ।
औद्योगिक योगदान के क्षेत्र में जेम्स वाट का नाम सर्वोच श्रेणी के वैज्ञानिकों में लिया जा सकता है। जेम्स वाट मैकेनिकल इंजीनियर थे। भाप के इंजन पर उनसे पहले भी कई वैज्ञानिक काम कर चुके थे,
लेकिन आखिर में सबसे अछा इंजन विकसित करने का श्रेय जेम्स के खाते में ही गया। उनके बारे में कहा जाता है कि एक बार उन्होंने आग के ऊपर रखे बर्तन के ढक्कन को बार-बार ऊपर नीचे होते देखा। जेम्स वाट ने इससे अंदाज लगाया कि भाप में शक्ति होती है जिसके चलते बर्तन का ढक्कन ऊपर नीचे हो रहा है।
बचपन में उनका यह विश्लेषण उनके बड़े होने पर भाप इंजन के अविष्कार का कारण बना और जेम्स वाट का नाम विज्ञान के इतिहास में अमिट हो गया।
भौतिक विज्ञानी केएस पांड्या के अनुसार भाप का इंजन न सिर्फ रेल इंजन के अविष्कार का कारण बना बल्कि इससे कृषि जगत से लेकर अंतरिक्ष क्षेत्र तक क्रांति आ गई। स्कॉटलैंड की राष्ट्रीयता वाले ब्रिटिश नागरिक जेम्स वाट ने अनुसंधान कार्य के लिए ग्लासगो यूनिवर्सिटी को अपने संस्थान के रूप में चुना।
जीवनकाल में उन्हें 1800 में ग्लास्को विश्वविद्यालय ने डॉक्टर और लौज की मानद उपाधि प्रदान की | 1814 में विज्ञान अकादमी में उन्हें सम्मानित किया | वृद्धावस्था में उन्हें राजनितिक विरोधो के साथ साथ पारिवारिक दुखो का सामना करना पड़ा |
उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में पुरे आकार की पाषाण प्रतिमाये बनाने की मशीन का आविष्कार किया था | अंतिम समय तक विपुल सम्पति के स्वामी जेम्स वाट शोध में लगे रहे | 25 अगस्त 1891 को 83 साल की उम्र में दुनिया को महान खोज देने वाले इस अविष्कारक का निधन हो गया।
उदाहरण 2. जेम्स वाट का जीवन परिचय – James Watt Biography in Hindi
वह एक मैकेनिकल इंजिनियर ही नहीं बल्कि स्कॉटिश खोजकर्ता और केमिस्ट भी थे जेम्स वाट ने वाट स्टीम इंजन का अविष्कार कर उद्योगिक दुनिया में क्रांति का दी थी और उस समय स्टीम इंजन का ज्यादातर उपयोग ग्रेट ब्रिटेन और बाकी अलग अलग देशो में भी हो रहा था।
उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र में प्रभावशाली बदलाव लाये थे जब जेम्स वाट ग्लासगो यूनिवर्सिटी उपकरण बनाने वाले के पोस्ट पर काम करते समय जेम्स वाट को स्टीम इंजन के तंत्रज्ञान में मन (एंटरस ) लगने लगा था।
जेम्स वाट का प्रारंभिक जीवन
जेम्स वाट का जन्म 19 जनवरी 1736 को क्लाईड की संकरी खाड़ी में ग्रीनोक्क बंदरगाह पर हुआ था। और जेम्स वाट के पिता जहाज के मालीक और ठेकेदार भी थे और साथ ही साथ वो गाँव के मुख्य बेली भी थे और जेम्स वाट की एग्नेस मुईरहेड, एक अच्छी पढ़ी-लिखी महिला थी जिसका संबंध एक टूटे हुए परिवार से था।
उनके माता और पिता दोनों ही पादरी संघ शासित गिरजे के सदस्य थे वाट के दादा, थॉमस वाट गणित के शिक्षक और बेली थे। धार्मिक माता-पिता के हातो बड़े होने के बावजूद बाद में वे अडिस्ट बने थे।
जेम्स वाट बचपन से ही बहुत गंभीर थे
जेम्स वाट ने बचपन से ही सोचा था की वो आगे जाकर जरूर कुछ नया करेंगे और वो सबसे अलग होगा | बचपन से ही जेम्स वाट सब बचो से अलग और गंभीर थे वह खेल भी ऐसे खेलते थे, जिनमें उनकी गंभीरता साफ नजर आती थी |
एक बार जेम्स वाट (James Watt Biography in Hindi) की माता चूल्हे पर खाना बनाने के लिए रखकर घर के अंदर कुछ काम कर रही थी। जेम्स चूल्हे पर रखी पानी के केटली को बहुत ध्यान से देख रहे थे।
उन्होंने देखा की केतली में उबल रहे पानी का भाप बार-बार केतली के ढक्कन को उठा दे रहा है। उन्होंने केतली पर एक कंकर रख दिया फिर भी थोड़ी देर बाद ढक्कन उठ गया तभी उन्हें लगा कि जरूर भाप कोई ना कोई शक्ति है।
James Watt हर रोज स्कूल नहीं जाते थे
बचपन में जेम्स वाट रोजाना स्कूल भी नही जाते थे। बचपन में उनकी प्यारी माँ जेम्स वाट को घर पर ही पढ़ाया करती थी और फिर बाद में james watt ने ग्रीनोक्क ग्रामर स्कूल जाना शुरू किया स्कूल के दिनों में उन्होंने साबित कर दिया कि उनके अंदर इंजीनियरिंग और गणित के गुण अधिक हैं।
जेम्स वाट क्यों प्रसिद्ध है
एक ऐसे आविष्कारक थे जो वैज्ञानिक तथा अभियान्त्रिकी क्षेत्र की समन्वित क्षमता के धनी व्यक्ति थे । जेम्स वाट ने जो वाष्प इंजन सम्बन्धी खोज की,उससे संसार को ऊर्जा तथा ऊष्मा की क्षमता का परिचय हुआ । औद्योगिक क्रान्ति लाने में वाट की यह खोज महान एवं उपयोगी साबित हुई है।
जेम्स वाट ने भाप का इंजन कब बनाया
1712 में, उन्होंने दुनिया का पहला वायुमंडलीय स्टीम इंजन बनाया जो who is james watt उन्होंने इंग्लैंड में कोयले की खान में स्थापित किया था। न्यूकॉमन की मृत्यु के समय, उनके 100 इंजन स्थापित किए गए थे। स्कॉटिश इंजीनियर जेम्स वाट (James Watt Biography in Hindi) ने एक अलग कंडेनसर जोड़कर न्यूकॉमन के शुरुआती मॉडल पर सुधार किया।
जेम्स वाट ने किसका आविष्कार किया
दुनिया में औद्योगिक क्रांति लाने वाले james wat ने बचपन में ही भाप की शक्ति को भांप लिया था और अपनी इसी विश्लेषण शक्ति के बल पर वह आगे चलकर भाप का इंजन बनाने में सफल हुए।
वाष्प इंजन का आविष्कार कब हुआ
1698 ई. में मार्क्सेव देला पोर्ता के इस सुझाव का उपयोग टामस सेवरी ने पानी चढ़ाने की एक मशीन में किया। इस प्रकार सेवरी पहला व्यक्ति था जिसने व्यावसायिक उपयोग का एक भाप इंजन बनाया, जिसका उपयोग खदानों में से पानी उलीचने और कुओं में से पानी निकालने में हुआ।
जेम्स वाट की ज़िंदगी बदल गई
जेम्स वाट की माता की अचानक मुत्यु होगी और उनके पिता को बिजनेश में बहुत ही नुकसान हुवा था | और उसके बाद जेम्स वाट की जिंदगी बदल गई और फिर उन्हें अपरेंटिस का काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इसके बाद पेट भरने के लिए एक घड़ी निर्माता के यहां काम करने के साथ कई छोटे-मोटे काम भी करने पड़े। 1757 में जेम्स ने अपनी छोटी-सी वर्कशॉप बना ली, जिसमें वह यान्त्रिक उपकरण ठीक करने लगे।
इसी बीच, उन्हें गुप्त ताप की खोज की घटना के बाद भाप सम्बन्धी शक्ति का ध्यान हो आया। उस दिनों में विश्वविद्यालय में एक स्लो स्लो काम करने वाला अधिक ईधन लेने वाला एक इंजन रिपेरिंग के लिए आया।जेम्स वाट ने इसे सुधारने की जिम्मेदारी उठाइ थी।
उन्होंने उसमें लगे भाप के इंजन में एक कण्डेन्सर लगा दिया, जो शून्य ( जीरो ) दबाव वाला था। इस वजह से पिस्टन सिलेण्डर के ऊपर नीचे जाने लगा। पानी डालने की जरूरत उसमें नहीं थी।
शून्य की स्थिति बनाये रखने के लिए जेम्स ने उसमें एक वायु पम्प लगाकर पिस्टन की पैकिंग मजबूत बना दी। घर्षण रोकने के लिए तेल डाला तथा एक स्टीम टाइट बॉक्स लगाया, जिससे ऊर्जा की क्षति रुक गयी। इस तरह वाष्प इंजन का निर्माण करने वाले जेम्स वाट पहले आविष्कारक बने।
जेम्स वाट द्वारा भाप के इंजन का आविष्कार
भाप के इंजन का आविष्कार का श्रेय जेम्स वाट को दिया जाता है और इस भाप के इंजन के आविष्कार से ही जेम्स वाट प्रसिद्ध है सबसे पहले भाप के इंजन का आविष्कार मशहूर आविष्कारक थॉमस न्यूकोमन ने इंजन बनाया था और उसके बाद जेम्स वाट (James Watt Biography in Hindi) ने किया था लेकिन यह कम शक्तिशाली था और इसमे ऊर्जा हानि ज्यादा थी। भाप का भी सही तरह से उपयोग नही था जिससे भाप की हानि भी अधिक मात्रा में होती थी।
जेम्स वाट ने अपने अविष्कार के दौरान एक बहुत ही ताकात करने वाला इंजन बनाया और इस इंजन ओधोगिक निर्माण में तेजी की बरसाद करदी 1763 के वर्ष में जेम्स वाट की वर्कशॉप में न्यूकोमन का बनाया स्टीम इंजन ठीक होने आया। इस भाप के इंजन में केवल एक ही सिलिंडर था जिससे भाप आकर नीचे पानी मे बैठ जाती थी।
शक्तिशाली इंजन
जेम्स वाट ने बनाये हुए इंजन में भाप को इकट्ठा करने के लिए एक कंडेनसर लगा दया था और वो कंडेनसर जीरो दबाव वाला था जिससे पिस्टन ऊपर नीचे गति करता था और पानी डालने की कोय जरुरत नही आए थी । शून्य दबाव बनाये रखने के लिए पिस्टन की पेकिंग को दुरुस्त और मजबूत किया और एक वायुपम्प भी लगाया।
ऐसा करने से यह इंजन और भी ताकतवर हो गया क्योंकि इसमें ऊर्जा और भाप की बहुत ही बचत हुई। जेम्स वाट के इस इम्प्रूवमेंट से भाप का इंजन न्यूकोमन के इंजन से अधिक शक्तिशाली हो गया।इस इंजन का उपयोग खदानों से पानी बाहर निकालने में होने लगा। james watt ने रोटरी स्टीम इंजन का निर्माण भी किया जो और भी ज्यादा शक्तिशाली था। इस इंजन से बड़ी मशीनरी भी आसानी से कार्य करने लगी।
महान वैज्ञानिक
आज हमारी सारी दुनिया महान वैज्ञानिक ओके आविष्कारों की वजह से बहुत ही विक्षित हुए है | दुनिया में बहुत सारे वैज्ञानिको की खोज का सर्वाधिक उपयोग करता है,
जेम्सवाट उन महान वैज्ञानिको मे एक हैं जब संपूर्ण विश्व ऊर्जा के किसी मजबूत एवं कारगर स्रोत की तलाश में था तब जेम्स वाट ने भाप इंजन के स्वरुप में बदलाव करके उसे सर्वाधिक सहयोगी बनाने का कार्य किया था । आधुनिक विश्व जिस औद्योगिक क्रांति के महानतम दौर से निकल कर वर्तमान तक आया है
उस औद्योगिक क्रांति का आधार ही जेम्स वाट के आविष्कारों पर आकर अटका था। जेम्स वाट ने ही पहली बार यह प्रतिपादित किया कि भाप में बहुत शक्ति है और अगर उसे समायोजित कर एक निश्चित केंद्र-बिंदु पर प्रशिक्षित किया जाए तो उससे प्राप्त होने वाली शक्ति से बड़ी से बड़ी मशीनें चलाई जा सकती है।
जेम्स वाट के छः चीजो पर एकल अविष्कार का पेटेंट है
- पेटेंट 913 A उन्होंने स्टीम इंजन में अलग से कंडेंसर को लगाकर उसका उपयोग करने की विधि बतायी थी।
- इसे 5 जनवरी 1769 को अपनाया गया था, जबकि 29 अप्रैल 1769 को इसे नामांकित किया गया था।
- 1775 में संसद में इसे जून 1800 तक बढ़ा दिया गया था।
- पेटेंट 1,244 शब्दों को कॉपी करने की नयी विधि बतायी, इस बदलाव को 14 फरवरी 1780 में अपनाया गया।
- 31 मई 1780 में इसे नामांकित किया गया था।
- 1,306 पेटेंट सूरज और ग्रह की परिक्रमण गति को बढ़ाने की नयी विधि बतलायी।
- इस बदलाव को 25 अक्टूबर 1781 में अपनाया गया और 23 फरवरी 1782 को इसे नामांकित किया गया।
- पेटेंट 1,432 स्टीम इंजन में उन्होंने कयी सुधार किये – जिसमे तीन बार मोशन और स्टीम कैरिज लगाया गया।
- इस बदलाव को 28 अप्रैल 1782 को अपनाया गया और 25 अगस्त 1782 को इसे नामांकित किया गया।
- पेटेंट 1,321, स्टीम इंजन में उन्होंने कयी सुधार किये – उसकी कार्यक्षमता बढ़ायी और डिजाईन भी बदला।
- 14 मार्च 1782 को अपनाया गया और 4 जुलाई 1782 को इसे नामांकित किया गया।
- पेटेंट 1,485 भट्टी के निर्माण की नयी विधि बतायी।
- इस बदलाव को 14 जून 1785 को अपनाया गया और 9 जुलाई 1785 को नामांकित किया गया।
जेम्स वाट की उपलब्धियां और जानकारी
- जेम्स वाट ने बनाया हुवा इंजन इतना शक्तिसाली हो गया।
- तरह तरह की फैक्टरियां जेम्स के इंजन से चलने लगी थी।
- ब्रिटेन की कपड़ा मिले इसी इंजन की सहायता से चलने लगे गयी।
- जेम्स वाट ने अपने इस इंजन का पेटेंट भी करवाया था जिससे जेम्स वाट ने काफी पैसा कमाया।
- अपने बिज़नेस पार्टनर वाल्टन के साथ मिलकर वाल्टन एंड वाट कम्पनी स्थापित की जिसके नीचे वाट ने स्टीम इंजन बेचे थे।
- जेम्स वाट ने भाप की शक्ति को अच्छी तरह से पहचान लिया था।
- उसी भाप की बदौलत से रेलगाड़िया चलने लगी थी।
- जेम्स वाट ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी सदस्य भी रहे थे।
- जेम्स वाट के सम्मान में ही विधुत शक्ति की एक इकाई का नाम वाट रखा गया था।
- इंजन की पावर को हॉर्स में मापा जाता है जिसको हॉर्स पावर नाम जेम्स वाट ने ही दिया था।
दुनिया के महान वैज्ञानिक और अविष्कार james watt की मुत्यु 25 अगस्त 1819 में हुई थी। यह महान वैज्ञानिक के अविष्कार भाप की शक्ति को पहचानकर उसको औधोगिक क्षेत्र में इस्तेमाल करके क्रांति लाये। जिससे औधोगिक निर्माण में बहुत तेजी आई थी।
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