सादा जीवन उच्च विचार पर निबंध - Essay On Simple Living High Thinking in Hindi

अपना ढंग बनाओ सादा ,

तड़क-भड़क में पड़ो न ज्यादा।

खाना सादा , पीना सादा ,

इस दुनियाँ में जीना सादा।

सादा जीवन उच्च विचार पर निबंध – Long and Short Essay On Simple Living High Thinking in Hindi

कहने का अभिप्रायः है हमें सादा जीवन व्यतीत करना चाहिए। दिखावटी जीवन हमें आँतरिक सुख प्रदान नहीं करता। जितने भी महान कवि , लेखक ,रचनाकार आदि हुआ है उनका जीवन हमेशा सादा रहा है। सादा जीवन का अर्थ यह कदापि नहीं हमें सादे वस्त्र धारण करने है।  इसका अर्थ अत्यंत व्यापक है।  सादा जीवन का अर्थ है हमारा जीवन हर पक्ष से सादा होना चाहिए।  कभी-कभी हम दूसरों को प्रभावित करने के लिए अनेक प्रकार के प्रचंड या उपाय करते है परन्तु यह सब एक मिथ्या और झूठ है।  झूठ से हम किसी को कुछ क्षण के लिए प्रभावित कर सकते है परन्तु अपने व्यक्तित्व के छाप नहीं छोड़ सकते है।

सादा जीवन का अर्थ

सादा जीवन का अर्थ है हमारे जीवन कर हरा पक्ष शारीरिक , सामाजिक , व्यावहारिक , धार्मिक आदि हर क्षेत्र सादा और उच्च होना चाहिए। हमारे वस्त्रो के साथ-साथ हमारे बोल , हमारा वार्तालाप भी अत्यंत सादा और उत्तम होना चाहिए। केवल सादे वस्त्र को धारण कर लेना तो मात्र दिखावा ही है।  जब हम किसी से वार्ता करे तो हमारे समक्ष व्यक्ति प्रभावित हो।  हमारे मन में सकारात्मक विचारधारा का  प्रवाह होना चाहिए। हमारे विचारों का क्षेत्र व्यापक होना चाहिए।  हमारे विचारो में मधुरता होनी चाहिए।

संतुष्ट जीवन

हमें एक सादा जीवन जीने के लिए अपने जीवन में सन्तुष्टता का गुण अपनाना होगा।  कभी-कभी लोग हमारे द्वारा किए गए कार्यो से संतुष्ट नहीं होते है या जानबूझकर उसमें खामियां निकालने का प्रयास करते हैं ताकि हम परेशान होकर , उत्तेजित होकर अपने अंदर के सन्तुष्टता गुण का त्याग कर दें और एक अव्यवस्थित जीवन का निर्वाह करें। इसे आप लोगो की ईर्ष्या भी कह सकते हैं क्योंकि आज लोग इस बात से ज्यादा दुःखी होते है कि सामने वाला खुश कैसे है।  आपके जीवन की परिस्थितयों से से दुसरे लोग कभी-कभी परिचित होते हैं परन्तु उनका दुःख ये होता है की आप सुखी कैसे है।  आपके जीवन की परिस्थितयो से आपका जीवन डगमगा क्यों नहीं रहा।  इसलिए सादा जीवन का आचरण अत्यंत कठिन होता है।

सादा जीवन के लाभ

सादा जीवन क्यों जीना चाहिए या उसको अपने आचरण का हिंसा क्यों मानना चाहिए यह उसमे निहित लाभों से पता चल जायेगा जो कि इस प्रकार है :-

पारिवारिक समीपता

आपका सादा जीवन न केवल आपको सादा बनाता है बलिक यह आपके जुड़े सभी सबंधो में निकटता लाता है।  एक सादा जीवन और उच्च विचार का जीवन आपको अपने संस्कृति और संस्कारो से जोड़े रखता है और परिवार के सभी लोगो के बहुत करीब होते है।  सभी लोग आपके साथ मधुर व्यवहार करते हैं क्योकि आपका मधुर व्यव्हार उनके अंदर भी मधुरता का संचार करता है।

सवदर्शन

यदि हम एक सादा जीवन वास्तव जीना चाहते है तो सर्वप्रथम हमें स्वयं का दर्शन करना होगा।  सामने वाला इन्सान कैसा है इससे आपका कोई लेना -देना नहीं।  आपका व्यक्तित्व कैसा है यह मायने  रखता है। संस्कृत में परसिध कहावत है :-

विदशेषु धनं विधा ,

व्यसनेषु धनं मति: ,

परलोके धनं धर्मः ,

शीलं सर्वत्र वेधनम।

इसका अर्थ है जिस प्रकार विदेश में विधा ही धन है, संकट में आपकी बुद्धि ही धन है और परलोक में आपका धर्म ही धन है परन्तु इन सबसे ऊपर आपका संतोष धन सर्वोपरि है जो सब धनो से बड़ा औइर विशाल है।  आपका सादा जीवन और उच्च विचार आपके जीवन में संतोष गुण लाता है और जिसके द्वारा आप जीवन की हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं।

साधारण जीवन

यदि आपने अपने जीवन में सादे जीवन का चयन किया है तो आप साधारण जीवन व्यतीत करेंगे।  आप अधिक पैसा कमाने की होड़ में , या बड़े घर , बड़ी दुकान की होड़ में अपना स्वास्थ्य नहीं ख़राब करेंगे।  आप सिमित साधनो के द्वारा भी अपने जीवन को भली भांति निर्वाह करेंगे और जीवन के वास्विकः सुख का अनुभव करेंगे।  कभी -कभी देखा जाता है लोग अपने जीवन को उच्च वर्ग का दिखाने के लिए रत-दिन पैसा कमाने में लग जाते है और अपना स्वास्थ्य भी ख़राब कर लेते है जिसके कारण वे अपना वर्तमान भी सही से नहीं जी पाते।  अतः हमें अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास अवश्य करना चाहिए पर साथ ही साथ अपने स्वास्थ्य का भी भली भांति ध्यान रखना चाहिए।

ऐतिहासिक जीवन

यदि हम ऐतिहासिक दृष्टि से देखे तो हमें ज्ञात होगा कि पुराने समय के लोग अत्यंत सादा  जीवन व्यतीत करते थे।  वे व्यर्थ के लोभो से आकर्षित नहीं होते थे उन्हें सादा खाना , सादा रहना अत्यंत पसंद था।  ऐसे ही महात्मा  गाँधी का जीवन बहुत ही साधारण था।  उन्हें सादा जीवन व्यतीत करना अत्यंत अच्छा लगता था।  महात्मा  गाँधी केवल साधारण जीवन जीने में तो विशवास करते थे पर साथ ही साथ उच्च आदर्शो में भी विश्वास करते थे। उनके उच्च आदर्शो में अहिंसा सर्वोपरि है जिसके बल पर  उन्होंने भारत देश को अंग्रेजो के चंगुल से आजाद कराया।

इसी प्रकार माहत्मा बुद्ध जो एक प्रसिद्ध राजा थे।  उन्होंने भी राजमहल का विलतापूर्ण जीवन त्याग कर एक साधारण जीवन जीना उचित समझा ताकि वे भगवान् को प्राप्त कर सके।  इसे प्रकार अब्राहिम लिंकन भी एक साधारण जीवन-शैली का आचरण करते थे वे अपने सभी कार्य बिना किसी की सहायता के करते थे।  इसी प्रकार एक महापुरुष अपनी जीवन-शैली में सादा जीवन और उच्च विचार को प्राथिमकता देते हैं।

सरल और साधारण जीवन जीने का तरीका

साधारण जीवन को व्यवहार में लाने के लिए हमें अपने जीवन में कुछ नियमों को अपनाना होगा जैसे हमें अपने तुलना दूसरों से नहीं करनी , हमें अपनी इच्छाओं पर नियंतरण करना आना चाहिए , हमारा अंतर्मन शांत होना चाहिए , हमेशा सबकी सहयता करे।

तुलना का त्याग

यदि हम्म एक साधारण और सादा जीवन जीना चाहते है तो हमें सबसे पहले अपनी तुलना दूसरों से करनी छोड़नी पड़ेगी।  क्योंकि जब हम अपनी तुलना अन्य लोगो से करते है तो हम हीन भावना का शिकार हो जाते है और हमारा मन अव्यवस्थित रहता है , वह अनेक प्रकार की उलझनों में उलझ कर साधारण जीवन नहीं  व्यतीत कर पाता और जीवन में जो कुछ उसके पास उपलब्ध होता है उसका भी आंनद नहीं ले पाता।

इच्छाओं पर नियंतरण

एक साधारण व्यक्ति का जीवन किसी भी प्रकार की इच्छा का आदि या उसके प्रति आसक्त नहीं होता।  यदि हमारी कोई इच्छा पूर्ण न हो और हमारा मन चिंतित जाये  सात्विक जीवन नहीं जी सकते।  सदा जीवन इच्छाओं से परे होता है।  यदि कोई इच्छा पूर्ण नहीं भी होती तो भी सन्तुष्टता रूपी धन व्यक्ति को अपने सादगी नहीं त्यागने देता।

अंतर्मन शांत

एक सादा जीवन व्यतीत करने वाले व्यक्ति का अंतर्मन अत्यंत शांत होता है।  उसके शांत चित की झलक उसके मुख से स्वतः हही  प्रदर्शित हो जाती है।  यही कारण है अत्यंत शांत रहने वाला व्यक्ति शीघ्रता से उत्तेजित नहीं होता और न ही अपना आपा खोता है।  वह अपने इन्द्रियों को वश में रख सकता है और अपने शांत चित से वह दूसरों को भी प्रभावित करता है।

आधुनिक युग

आज का युग अत्यंत विलासता से लिप्त है।  आज का युवा वर्ग सादा -जीवन और उच्च विचार जैसे विचारों को तुच्छ समझाता है।  आज की पीढ़ी के अनुसार यदि हम साधारण जीवन जीते है तो लोग हमें बैकवर्ड समझेंगे जिसका अर्थ है लोग हमें पुराने ज़माने का समझेंगे।  जबकि ऐसा बिलकुलआज भी जब हम अपने जीवन-साथी का चुनाव करते है तो हम यह जरूर उम्मीद रखते है वो संस्कारी हो , दूसरों की इज्जत करने वाला हो , वो घर के माहौल के अनुसार स्वयं को उसके अनुकूल बना ले।

इसलिए सादा जीवन हम सभी चाहते है अपर हम उम्मीद करते है दूसरा व्यक्ति उन नियमो का पालन करे।  जिसके कारण हम सदा जीवन अपननाना तो चाह्ते है पर दूसरों के लिए।  इस तरह की प्रतिस्पर्धा ही कलह का कारण बनती है और सम्बन्धो में टकराव का कारण बनती है। कहते है:-

कहना सरल है पर करना कठिन है

उपदेश देना सरल है पर अमल करना कठिन है

साधु बनना सरल है पर साधुता धारण करना कठिन है

गलती निकालना सरल है पर गलती को सुधारना कठिन है

जीवन सरल है , पर जीना कठिन है।

सात्विक जीवन

सादा जीवन केवल साधन वस्त्र धारण कर लेने से या सादा भोजन ग्रहण करने से प्राप्त नहीं होता है।  इसके साथ-साथ हमारा रहने का तरीका , हमारा व्यवहार  भी पूर्ण रूप से सात्विक होना चाहिए।  हमारा अंतर्मन हमेशा सकारात्मक विचारो से युक्त होना चाहिए और उसमे किसी भी प्रकार का द्वेष , कलह , मत-भेद नहीं होना चाहिए।  सात्विक जीवन श्रेष्ठ है।  एक सात्विक जीवन ही सादा जीवन कहलाता है।

निष्कर्ष

सादा जीवन और उच्च विचार रखना हर व्यक्ति का लक्ष्य होना चाहिए।  हमें यह समझना होगा ख़ुशी हमारे भीतर ही विधमान रहती है।  बस उसे पहचानने की जरुरत है।  जब हम स्वयं को पहचान जायेंगे तो हमें बाह्य साज-सज्जा से फर्क नहीं पड़ेगाऔर हम सादा-जीवन के महत्व को समझ सकेंगे।