सदाचरण पर निबंध - Essay On Moral Values in Hindi

जैसे बहुत सारे मनुष्य अपने नाम से जाने जाते हैं वैसे कुछ लोग अपने अपने व्यवहार से जाने जाते हैं। सदाचरण का मतलब होता है अपने से बड़ों की बात मानना ,सुनना और उनसे मधुर तरीके से पेश आना इसे सदाचरण कहते हैं ।एक बच्चे का आचरण सदैव उसके परिवार से शुरू होता है क्योंकि उस पर सबसे पहला प्रभाव उसके परिवार का होता है।

सदाचरण पर निबंध – Long and Short Essay On Moral Values In Hindi

उसका आचरण उसके माता-पिता के कार्यों, पर उनके रहने के तरीकों पर ,उनके बात करने के तरीके पर निर्धारित होता है एक माता पिता को अपने घर का वातावरण बिल्कुल वैसा रखना चाहिए जैसा वह बच्चे को सिखाना चाहते हैं। दूसरी जगह है उसका स्कूल, उसके दोस्त ,और उसके खेलने की जगह जहां से बच्चे के आचरण पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। इसीलिए प्रायः बच्चों को उस वातावरण में रखना चाहिए जहां पर वो सदाचार सीखें और समय-समय पर नेक काम करने की प्रेरणा देते रहें। अगर इंसान का कोई सबसे अच्छा मित्र होता है तो वह होता है सदाचार क्योंकि हमारे पास पैसा होता है जो आता जाता रहता है लेकिन सदाचार एक ऐसी पूजी है जो हमेशा हमारे साथ रहती है

सदाचरण से जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव

सदाचरण मनुष्य के व्यक्तित्व निर्माण के लिए सबसे एक महत्वपूर्ण गुण है। एक मनुष्य के व्यक्तित्व की पहचान उसके आचरण से ही होती है। इस समाज में लोग सबसे ज्यादा उसी को पसंद करते हैं जिसका आचरण सबसे ज्यादा अच्छा होता है। लोग उसी के पास जाना पसंद करते हैं जो सबसे सही तरीके से पेश आता है। एक अच्छे आचरण वाला व्यक्ति वह हमेशा सामाजिक बुराइयों से जैसे गुस्सा करना मारपीट करना , लड़ाई करना ,गलत तरीके से पेश आना ,औरतों की इज्जत ना करना ,बड़े लोगों से बदतमीजी से बात करना इन सब चीजों से बहुत दूर रहता है ।और उसका जीवन सदैव  सुखमय  और  शांतिपूर्वक  बना रहता है।

शायद यही कारण है कि सामाजिक लोग उसके पास आना उससे बातें करना उसके साथ रहना पसंद करते हैं । सदाचरण की वजह से कभी भी किसी इंसान में घमंड नहीं आता है और हमेशा एक मनुष्य को मधुर निर्मल और शांत बनाते है।

सदाचरण जीवन का एक बहुमूल्य गहना होता है

जिस प्रकार गहना पहनने से एक स्त्री की शोभा बढ़ जाती है उसी प्रकार सदाचरण से एक मनुष्य की शोभा अत्यंत बढ़ जाती है। सदाचरण जीवन का एक ऐसा मूल मंत्र है जिससे मनुष्य अपना जीवन और दूसरों का भी जीवन शांतिपूर्वक बिता सकता है। सदाचरण से कोई भी मनुष्य अपनी तरफ किसी को भी अपने व्यवहार से अपने बातचीत से आकर्षित कर सकता है।

हमने अपने इतिहास में ऐसे बहुत सारे उदाहरण पड़े हैं जहां पर लोगों ने अपने आचरण से दूसरे लोगों को आकर्षित किया है जैसे महात्मा गांधी उन्होंने देशवासियों को अपने सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ा कर अपने सरल स्वभाव से अपने सदा आचरण से लोगों को आकर्षित किया है बिल्कुल वैसे ही गौतम बुद्ध ने भी अपने सदाचरण से ही लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लिया था इससे हमें पता चलता है की एक सदाचरण इंसान सिर्फ अपने लिए नहीं अपने समाज के लिए भी सोचता है ।

इस समाज के कल्याण के बारे मैं भी सोचता है और सदैव लोगों की सेवा करने के लिए तत्पर रहता है। उसकी सोच में सदैव सबसे पहले अपने समाज को सुख पहुंचाने की जिज्ञासा होती है उसके बाद अपने आप को। ऐसे मनुष्य अपने मन में समर्पण की आशा रखते हैं और स्वयं की कुर्बानी देने के लिए कभी नहीं पीछे हटते।

सदाचारी व्यक्ति के गुण

एक सदाचारी व्यक्ति प्रायः एक मित्र के रुप में पाया जाता है जो हमेशा सरल स्वभाव से किसी को सुझाव देता है ताकि उसका भला हो सके और वह अपने जीवन में कुछ अच्छा कर सकें । सदाचारी व्यक्ति हमेशा अपने मित्रों को सत्य की राह पर चलने के लिए कहता है और कभी भी उससे गलत कार्य करने के लिए नहीं उकसाता। यदि आप कोई गलत कार्य करना चाहते ही हैं तो यह आपको जाने नहीं देते और ईश्वर की तरह क्या आपके साथ रहते हैं ।इनके मन में कोई छल कपट की भावना नहीं रहती है ।और यह स्वयं को पीछे रखकर आपको आगे देखना चाहते हैं।

निष्कर्ष

सदाचरण जीवन का मूल मंत्र है। जिसका पालन करके हम अपने आप को अपने आसपास रह रहे लोगों को बहुत ही प्रशंसनीय कर सकते हैं और उनके साथ खुशी के दो पल बिता सकते हैं।  सदाचरण एकाएक हमारे जीवन में नहीं आ जाता इसके लिए हमें खुद को थोड़ा समय देना पड़ता है ।और क्या गलत है क्या सही है इसके बारे में सोचना पड़ता है।