आपने न्यूज़ पेपर या TV में कई बार इस शब्द को देखा या पढ़ा होगा लेकिन क्या आपको पता है सेंसेक्स कैसे काम करता है आज हम आपको सेंसेक्स से जुड़ी वो सारी जानकारी देंगे।
संसेक्स क्या है? (Sensex Kya Hai)
शब्द है जो कि है सेंसिटिव और इंडेक्स यह बाजार का संवेदी सूचकांक है | सेंसेक्स द्वारा बॉम्बे स्टॉक एक्सएचन्ज में लिस्टेड कम्पनीज को ही इंडेक्स किया जाता है | इसलिए इसे BSE- सेंसेक्स भी कहा जाता है |
सेंसेक्स की शुरुवात 1986 में हुई थी और इसका आधार वर्ष 1978-79 को माना गया है और इसकी आधार वर्ष को 100 रखा गया है । आधार वर्ष सेंसेक्स की गणना करते वक़्त काम में आती है |
सेंसेक्स भारत का स्टॉक मार्किट इंडेक्स है जो बाजार में हो रही तेज़ी और मंदी को दर्शाता है | जिसके माध्यम से हम पता लगा सकते है की बाजार का क्या हाल चल रहा है |
सेंसेक्स में पहले टॉप 30 BSE कंपनिस को ही रखा जाता था लेकिन June, 2017 से इसमें में 31 कंपनियों को रखा जाने लगा है ।
सेंसेक्स पूरे दिन इन 31 कंपनियों के स्टॉक पे नज़र रखता है और फिर शाम को एक औसत वैल्यू दे देता है जो बाजार का पूरे दिन का हाल बता देता है
सेंसेक्स एक प्रकार का सूचकांक होता है, सेंसेक्स को स्टॉक एक्सएचन्ज सेंसिटिव Index के नाम से भी जानते है, यह इंडिया का सबसे पुराना स्टॉक मार्केट इंडेक्स है, सेंसेक्स की शुरुआत 1986 में हुई थी,
सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सएचन्ज के शेयर्स के भाव में होने वाली तेजी और मंदी को बताता है, इसके अन्दर 30 कम्पनियां आती है, सेंसेक्स इसके अन्दर आने वाली कंपनी के शेयर्स में आये उतार-चढ़ाव पर नजर रखता है,
यह आज के समय में भारतीय GDP ( सकल घरेलू उत्पाद) का कुल 37% है।भारत में शेयर बाजार का मापक मुंबई शेयर बाजार (बीएसई) का संवेदी सूचकांक ने रजत जयंती वर्ष में प्रवेश किया है। इसकी स्थापना 2 जनवरी 1986 को उस समय की काफी सक्रिय 30 शेयरों के साथ हुई थी, 1979 आधार वर्ष था। आजकल संवेदी सूचकांक के 30 शेयर बीएसई के कुल पूंजीकरण का लगभग 15वां हिस्सा है।
बीएसई में 4700 से अधिक कंपनियां सूचीबध्द हैं जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार बनाती हैं। हालांकि सभी शेयरों में सक्रिय कारोबार नहीं होता। उनसे भी थोड़े से शेयरों से ही बाजार और अर्थव्यवस्था के रूख के बारे में पता चलता है।
संवेदी सूचकांक की स्थापना के समय मुंबई शेयर बाजार ने कहा था, न्न बाजार के सामान्य रूख को प्रदर्शित करने के लिए इक्विटी मूल्यों के सूचकांक की कमी काफी समय से निवेशकों और समाचार पत्रों द्वारा महसूस की जा रही थी, क्योंकि वे अपना सूचकांक तैयार नहीं कर पाते थे।
सेंसेक्स की कार्य प्रणाली
स्टॉक मार्केट इंडेक्स का काम स्टॉक मार्केट में शामिल सभी शेयर्स के भाव की जानकारी लेता है और एक औसत वैल्यू दिखाता है जिससे की लोगों को स्टॉक मार्केट के सभी शेयर्स के भाव में होने वाली तेजी और मंदी के बारे में पता चलता रहे।
सेंसेक्स से हमें पता चलता है की जिन कंपनी के शेयर्स (BSE) में लिस्टेड है वो किस तरह से काम कर रही है, अगर कंपनी अच्छा काम करती है तो शेयर बाज़ार में भी तेजी होती है, और अगर कंपनी को लाभ कम हो रहा है या कंपनी अच्छा काम नहीं करती है तो शेयर बाज़ार में भी मंदी होती है।
सेंसेक्स का पैमाना
मापने के लिए आधार वर्ष 1978-1979 चुना गया है, उस समय सेंसेक्स का आधार मूल्य सिर्फ 100 रुपये था, बॉम्बे स्टॉक एक्सएचन्ज को पहली बार 1986 में इसकी को गणना किया गया था, और 1 सितम्बर 2003 के बाद से फ्री फ्लोट मेथोड से सेंसेक्स की गणना होने लगी
फ्री फ्लोट मेथोड में कंपनी के जो शेयर्स जो पब्लिक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहते है और सरकार का हिस्सा दोनों को निकाल दिया जाता है, और जो बैलेंस बचता है वो मार्केट में पब्लिक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहता है।
सेंसेक्स के फायदे
अगर सेंसेक्स बढ़ता है तो कंपनी को फायदा होता है, और जब Company को फायदा होता है तो शेयर्स खरीदने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है जिससे कंपनी के शेयर्स के भाव भी बढ़ जाते है जिससे कंपनी का विकास होता है।
जब शेयर्स मार्केट अच्छा होता है तो सेंसेक्स भी उपर जाता है जिससे विदेशों से भी निवेशक शेयर्स खरीदते है जिससे हमारी भारतीय कर्रेंसी पर अच्छा असर होता है, और भारतीय कर्रेंसी विदेशी कर्रेंसी की तुलना में मजबूत हो सकती है।सेंसेक्स के बढ़ने से शेयर्स होल्डर को भी फायदा होता है और देश की अर्थव्यवस्था में भी सुधार आता है जिससे आम लोगों को फायदा मिलता है।
निष्कर्ष
आज की लेख में आपको सेंसेक्स क्या है और कैसे काम करता है की जानकारी मिली और इस लेख में हमने आपको सेंसेक्स क्या होता है के बारे में बताया।सेंसेक्स शेयर बाजार का ही नहीं बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था का भी सूचक है और भारतीयों के अलावा पूरी दुनिया की नज़र इस पर रहती है।
