Cloud Computing क्या है? इसके क्या लाभ है पूरी जानकारी

वर्तमान समय में जहाँ कंप्यूटर और मोबाइल की मांग बढ़ती चली जा रही है , वहीं उनके डाटा को सुरक्षित और स्टोर करने की भी एक मांग बढ़ती चली जा रही है , जिसे हम डिजिटल स्कैनिंग का नाम दे सकते हैं।  चाहे कोई उधमी छोटा व्यापार करे या बड़ा , हर उद्यमी व्यापार का लेखा -जोखा सुरक्षित रखना चाहता है.

Cloud Computing Kya Hai?

जिसके लिए उसे IT टीम की आवश्यकता हो सकती है , हो सकता है IT रूम अथवा सर्वर रूम भी बनवाना पड़े।  यदि कोई बड़ा उधमी है तो उसके लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है , परन्तु यदि कोई छोटा उद्यमी है या जिसने अभी-अभी व्यापार करना शुरू किया है तो वह हर सुविधा को नही अपना सकता है , उसे व्यापार के लिए स्टोरेज हब भी चाहिए और समय समय पर अपने डाटा में updation और backup के लिए IT support भी चाहिए और उसे व्यापार में लाभ भी चाहिए , और इसके अतिरिक्त आज के समय में स्पेस की  बहुत कमी है , ऐसे में क्लाउड कंप्यूटिंग एक जुगाड़ का और सस्ता विकल्प है। क्लाउड कंप्यूटिंग को हिंदी में मेघ संगणना कहा जाता है।

आज लोग अपना ऑफिस खोलने के लिए एक फ्लोर lease अथवा पट्टे पर ले लेते हैं और अपना सर्वर रूम एक third पार्टी से सम्पर्क करके उनके ऑफिस में बना देते हैं।  इस प्रकार थर्ड पार्टी संबधित कंपनी के डाटा को सुरक्षित करने में मदद करती है।

इसमें डाटा को बहुत ही सुरक्षित रखा जाता है और कोई भी वायरस या बाहर का व्यक्ति इस सुरक्षित डाटा को चोरी नहीं कर सकता , जिसके कारण इसकी मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।  क्लाउड कंप्यूटिंग में कम से कम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की जरुरत पड़ती है।  आज के युग में बहुत सारी कम्पनियाँ क्लाउड कंप्यूटिंग  का प्रयोग कर रही हैं और इसकी सर्विस भी प्रदान कर रही हैं।  क्लाउड कंप्यूटिंग  में जिस टेक्नोलॉजी और  इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनाया  गया है  जो दिखाई नहीं देता जिसे HTTP , XML , Ruby , PHP जैसी टेक्नोलॉजीज का प्रयोग करके बनाया जाता है।

स्पेस की कमी और यह तकनीक सस्ती होने के कारण बहुत सारी कम्पनियाँ क्लाउड कंप्यूटिंग  का फायदा उठा रही हैं।  इस तकनीक में आप इस सर्विस का जितना इस्तेमाल करोगे उतना ही पैसा देना है , जैसे डिश  रिचार्ज में होता है , जितना उसे यूज़ करना होता है , या किया होता है उसके अनुसार आपको बिल का भुगतान करना पड़ता है।

क्लाउड कंप्यूटिंग की विशेषताएँ

  • इसमें आपको सर्वर रूम बनाने के लागत बच जाती है।
  • इसमें कम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।
  • इसके काम करने का तरीका बेहतर है।
  • इसमें आपको आईटी रूम अथवा सर्वर रूम से सम्बंधित मेन्टेन्स का खर्च भी बच जाता है।
  • इसमें आपके कम्यूटर और क्लाउड कंप्यूटिंग के मध्य का संबंध अनुकूल रहता है।
  • इसमें आपका डाटा बहुत सुरक्षित रहता है।
  • इसमें आपके डाटा का बैकअप पल पल रहता है ताकि कोई भी फाइल यदि गलती से डिलीट भी हो वो उसी समय बैकअप डाटा से अपलोड हो सकती है।
  • यह एक विश्वसनीय तकनीक है।
  • इसके अंतर्गत आप जितना स्टोरेज डाटा करना चाहते हैं उतना ही आपको पेमेंट , जैसे यदि आपको 50GB डाटा स्टोर करना है तो आपको 50gb डाटा को सुरक्षित  के ही पैसे देने है , इसके  हैवी हार्डडिस्क का पेमेंट करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें समय की बचत , एक प्लेटफॉर्म जो सर्वर रूम के लिए आवश्यक है उसकी बचत , सर्वर रूम के प्रबंधक का खर्चे इन सबकी बचत होती है।  यह एक सस्ता , विश्वसनीय , साधन है जिस अपर आंख बंद करके विश्वास किया जा सकता है। इसे आप किराये का घर अथवा मॉडल भी कह सकते हैं क्योंकि इसके अंतर्गत आपको तभी पेमेंट करनी है जब तक आप इसकी सेवाओं का प्रयोग कर रहे हैं।

क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रकार

क्लाउड कंप्यूटिंग मुख्यतः चार प्रकार की होती है , या कहने को चार मॉडल होते है , हर व्यापारी अपने बजट और व्यापार के हिसाब से इनका चयन कर सकता है , डेवलपमेंट मॉडल के आधार पर इसके प्रकारों का वर्णन नीचे किया गया है :-

प्राइवेट क्लाउड (Private Cloud )

पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग बहुत कम बजट में होने के कारण इनका प्रयोग बहुत सारे लोगो द्वारा किया जाता है।  इसे सर्विस प्रोवाइडर द्वारा मैनेज किया जाता है। इसमें AWS , Azure प्रमुख है जो पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग कर रहे हैं।

कम्युनिटी क्लाउड (Community Cloud )

कम्युनिटी क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग एक सामूहिक ग्रुप द्वारा किया जाता है , कोई बाहर का व्यक्ति उस वेबसाइट को एक्सेस नहीं कर सकता है , जैसे आजकल हर स्कूल ने अपनी एक वेबसाइट बनाई हुई है , उसे छात्र , या स्कूल के टीचर या बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर ही एक्सेस कर सकते हैं और उसमे भी कंडीशन रहती है , हर ग्रुप केवल अपने क्षेत्र से सम्बंधित डाटा ही देख सकता है , किसी और के डाटा को पढ़ या उसमे किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं कर सकता है। या जैसे सरकारी कार्यो के लिए कुछ वेबसाइट बनाई गई हैं जिसे केवल सम्बंधित सरकारी विभाग द्वारा ही एक्सेस किया जा सकता है , कोई प्राइवेट संस्था इस वेबसाइट का न तो ओपन कर सकती है और न ही इसमें कोई बदलाव कर सकती है।

पब्लिक क्लाउड (Public Cloud )

प्राइवेट क्लाउड कंप्यूटिंग के अंतर्गत सर्विस प्रोवाइडर और सर्विस यूजर के मध्य का डाटा एक प्राइवेट क्लाउड से सुरक्षित रहता है , जिसे किसी बाहर के व्यक्ति द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता और न ही किसी बाहर के यूजर को शेयर किया जा सकता है। इसके अंतर्गत समस्त डाटा को एक यूजर id और पासवर्ड से सुरक्षित किया जाता है , बिना user id और पासवर्ड के आपके ड्राइव को देख नहीं सकता है।

हाइब्रिड क्लाउड (Hybrid Cloud )

इसमें प्रयोग करने वाले अलग अलग प्रकार से एक दूसरे से जुड़े रहते हैं , इसमें B2B (Business to Business ) और B2C (Business to Consumer ) दोनों मिल कर एक ही क्लाउड कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करते है ताकि आपस में डाटा कनेक्टिविटी बनी रहे।  इसे ही हाइब्रिड क्लाउड कंप्यूटिंग  कहते हैं।  हाइब्रिड क्लाउड कंप्यूटिंग प्राइवेट  पब्लिक क्लाउड कंप्यूटिंग  मिश्रित रूप है , जिसके अंतर्गत कुछ कार्यो  का एक्सेस प्राइवेट होता है , तो कुछ का सार्वजनिक होता है जिसे कोई भी एक्सेस कर सकता है।

क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग दिन प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है , जैसा की हमने पहले बताया बहुत सारी कम्पनियाँ इस सर्विस का प्रयोग कर रही हैं , उनमें से कुछ का वर्णन इस प्रकार है :-

यूट्यूब :- यूटुब एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन गया है जहाँ लाखों लोग अपने कला से सबंधित वीडियो पोस्ट करते है और प्रसिद्ध भी होते हैं।  इन सब वीडियोस को सुरक्षित करने और स्टोर करने के लिए youtube ने इस टेक्नोलॉजी को अपनाया है।

फेसबुक :– फेसबुक जो आज भारत में नहीं बल्कि भारत से बाहर भी लोग इसका इस्तेमाल करते हैं , बहुत सारे लोग जिनका  अपने स्कूल फ्रेंड्स , कॉलेज फ्रेंड्स से कनेक्शन खत्म हो गया था , आज फेसबुक के जरिए उन सभी फ्रेंड्स को ढूंढा जा सकता है , इन सभी डाटा को सुरक्षित रखने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग बेहतर उपाय है।

इमेल्स :- वर्तमान समय में सारी कपंनियां ईमेल पर काम करती है , ईमेल के द्वारा एक दूसरे से वार्ता करते हैं और व्यापारिक सबंधो को सुडोल और विश्वसनीय बनाने में ईमेल सिस्टम अधिक प्रभावी है। बहुत सारी कम्पनियाँ gmail . रेडिफमेल , हॉटमेल , yahoo जो ईमेल प्रोसेसिंग का कार्य और वो कम्पनियाँ जो डाटा स्टोरेज का काम करती  है जैसे यांडेक्स, मीडिया फायर और मेगा आदि कम्पनियाँ क्लाउड कंप्यूटिंग का ही इस्तेमाल करती हैं।

क्लाउड कंप्यूटिंग का इतिहास

वैसे  क्लाउड कंप्यूटिंग का आरम्भ 1960  से माना जाता है , जब इंटरनेट की शुरुआत नहीं हुई थी।  1990 में जब salesforce  नामक कंपनी ने वेबसाइट से सबंधित सेवाओं को लोगो के समक्ष प्रस्तुत किया और लोगों ने भी महत्व को समझा , जिससे यह साबित  भविष्य में यह सर्विस समस्त संसार के लिए एक दर्पण का काम करेगी जिससे आप अपने भूतकाल में किए गए काम को भी जैसा तैसा प्राप्त कर पाएंगे चाहे उसे कितने साल बीत जाए। वर्तमान समय में Google , Yahoo , अमेजॉन जैसी बड़ी कम्पनियाँ इस सर्विस का प्रयोग करके उसका बेहतर लाभ उठा रही है।

क्लाउड कंप्यूटिंग कैसे काम करता है

इसके अंतर्गत बहुत सारे सर्वर क्लाउड से कनेक्ट होते हैं , आप दुनियाँ के किसी भी कोने से अपने डाटा को एक्सेस कर सकते हैं ,  यदि आपके पास सबंधित डाटा को लॉगिन करने का authorization है।  क्लाउड कंप्यूटिंग ड्यूल लेयर  कार्य का सचालन करती है , इसमें एक front end होता है , जिसका प्रयोग क्लाइंट द्वारा किया जाता है , दूसरा बैकेंड होता है जिसका प्रयोग सर्वर को मैनेज करने वाली कंपनी द्वारा किया जाता है , इस प्रकार सर्विस प्रोवाइडर और सर्विस यूजर दोनों एक दूसरे से जुड़े रहते हैं।

उदाहरण

वर्तमान समय में सब लोग क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग कर रहे हैं , चाहे वो एक प्राइवेट संस्था हो या कोई सरकारी संस्था , या स्कूल और यूनिवर्सिटी।  उनमे से कुछ का उदाहरण नीचे दिया गया है :-

  • गूगल ड्राइव , ड्राप बॉक्स , फेसबुक जोकि क्लाउड कंप्यूटिंग का लगातार प्रयोग कर रहे है।
  • शिक्षा के क्षेत्र में भी अनेक वेबसाइट प्रचलित है जो आज क्लाउड कम्पूटरिंग का प्रयोग करके ऑनलाइन ही शिक्षा दे रही है और सभी आयु वर्गों को शिक्षित करके टेकनोलोजी से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। जिसमे वेदांतु , biju , white जूनियर HR प्रमुख उदहारण है।
  • अब सरकार भी इस तकनीक का प्रयोग करके अपनी सेवाओं को इ-कॉमर्स के जरिए लोगो को बता रही है और उनका लाभ भी उठा रही है।

क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रकार :- सर्विस के आधार पर क्लाउड कंप्यूटिंग के तीन प्रकार है :-

IaaS (Infrastructure as a Service ) :- इसके अंतर्गत बाहरी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर द्वारा कार्य अथवा व्यवसाय के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा प्रदान करती है। IaaS कंप्यूटिंग का प्रयोग करके बहुत सारी लगता से बचा जा सकता है जैसे मेन्टेन्स , Buying New Components , जैसे हार्डडिस्क , आईटी प्रबंधक का खर्चा , सर्वर रूम का खर्चा , extrenal स्टोरेज डिवाइस आदि। इसमें आमतौर पर फ्री डाटा सेंटर होते हैं , जिसमे हार्डवेयर रिसोर्सेस पर बहुत सारे सर्वर काम करते हैं। यह छोटे व्यापारियों के लिए रामबाण है , क्योकी इसमें उनके इंफ्रास्ट्रक्चर की बचत हो जाती है , जो कंपनी  क्लाउड सर्विस प्रोवाइड करती है वो इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मैनेज करती है।

PaaS (Plateform as a Service ) :- इसके अंतर्गत डेवलपर को एक प्लेटफॉर्म दिया जाता है जिसकी सहयता से वे एप्लीकेशन का निर्माण कर सकते हैं।  इसे क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर द्वारा होस्ट किया जाता है और इंटरनेट का प्रयोग करके वेब डेवलपर अथवा यूजर किसी भी जगह से अपने डाटा को एक्सेस कर सकता है। जैसे आजकल White जूनियर HR , कंप्यूटर कोडिंग लैंग्वेज के जरिए एप्प बनाना सिखा रहा है , इसमें आपको किसी तरह के टूल्स की आवश्यकता नहीं है , आपको अपने user id से लॉगिन करके खुद से वेब डेवलपिंग सिखाते हैं। इस प्रकार की एप्प में समय समय पर नए अपडेट होते रहते है जिसके कारण कई नई चीजों को सीखने को मिलती है जैसे डेवलपर , टेस्टिंग , स्टोरेज , होस्टिंग , एप्लीकेशन मेन्टेन्स आदि।

SaaS (Software as a Service ):- इसके अंतर्गत क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर अथवा वेंडर द्वारा एप्लीकेशन को होस्ट किया जाता है , जो एक backend support के तरह यूजर की मदद करता है और यूजर को इंटरनेट के जरिए उसका डाटा उपलब्ध कराया जाता है।