वर्तमान समय डिजिटलीकरण का समय है। ऐसे में हर वस्तु डिजिटल हो चुकी है। बैंक,अस्पताल,दफ्तर,स्कूल,कॉलेज हर जगह सब कुछ ऑनलाइन होने लगा लगा है। अब तो स्तिथि ऐसी है कि बिना इंटरनेट और मोबाइल के जीवन जीना संभव ही नहीं है जिस प्रकार जीवन के लिए पानी,भोजन,वायु अनिवार्य है उसी प्रकार जीवन के कार्यों को सुचारू रूप से कार्यरत बनाने के लिए इंटेरनेट अनिवार्य है।
आधुनकि समय कोरोनॉ का समय है ऐसे में हर व्यक्ति अपने घर पर रह कर ही कार्य कर रहा है जिसे हम वर्क फ्रॉम होम कहते है। ऐसे में शिक्षा संस्थायें, विद्यालय, विश्विद्यालय आदि सारे शिक्षा से संबंधित क्षेत्र भी घर बैठ ही ऑनलाइन के माध्यम से बच्चों को पढ़ा रहे है और बच्चे भी इसकी मदद से अपनी पढ़ाई को गतिशील बनाये हुए है।
ऑनलाइन अध्ययन के लाभ व नुकसान – Advantage And Disadvantage Of Online Classes in Hindi
ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से शिक्षक घर बैठे ही इंटेरनेट के माध्यम से देश के किसी भी कोने के बच्चों को पढ़ा सकते है। इसमे शिक्षक और विद्यार्थी दोनो ही अपनी सुविधा के अनुसार समय का चयन कर सकते है और क्लास के लिए जुड़ सकते है। ऑनलाईन शिक्षा के लिए कई तरह के ऐप्प आज चलन में है जैसे ज़ूम,गूगल मीट,व्हाट्सअप, स्काइप आदि।
आज कोरोनॉ के समय हमें अनेकों कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है और उनमें में से एक है विद्यार्थियों की शिक्षा।दूरस्थ शिक्षा ने इस कठिनाई का सामना आसानी से कर दिया है। अब सरकार के निर्देश अनुसार शिक्षक विद्यार्थियों को घर बैठे ही पढ़ रहे है जिससे उनकी शिक्षा में कहीं कोई बाधा न आये। ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा एक ऐसी प्रणाली है जिसमे शिक्षक विभिन्न प्रकार के उपकरणों का प्रयोग करके शिक्षा को आसान बनाते है।
ऑनलाइन शिक्षा के फायदे-ऑनलाइन शिक्षा विद्यार्थियों को यह अवसर प्रदान करती है कि वे शिक्षक के साथ नियमित संपर्क बना सके क्योंकि नए ऐप्प के माध्यम से विद्यार्थी जब चाहे संपर्क बना कर अपने सवालों का जवाब पा सकते है,ट्यूशन सिर्फ एक या डेढ़ घंटे के होते थे उसमे फिर समय सीमित हो जाता था। ऑनलाइन शिक्षा काफी फ्लेक्सिबल होती है क्योंकि इसमें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों अपनी सुविधा के अनुसार क्लास रख सकते है और यदि कभी आव्यशकता पड़े तो चलती हुई क्लास को बीच में स्थगित भी कर सकते है। ऑनलाइन स्क्रीनगिंग से बच्चों को काफी फायदा होता है,
उनको विषय को समझने में आसानी होती है और साथ ही पढ़ाई रोचक बन जाती है।प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से शिक्षण व्यवस्था में काफी बदलाव आया है। शिक्षक के लिए अब ऑनलाइन फ़ाइल शेयरिंग,पीडीएफ भेजना,परीक्षा लेना सब कुछ बहुत आसान हो गया है। वहीं विद्यार्थियों के लिए भी सुविधा है कि उन्हें यात्रा नहीं करनी पड़ती है,साथ ही समय का भी बचाओ होता है। नए-नए तकनीकों का प्रयोग करके बच्चों को शिक्षक द्वारा शिक्षित किया जा रहा है। पहले विद्यार्थियों को लंबी यात्रा करके दूर कॉलेज या विद्यालय जाना पड़ता था परंतु अब यह परेशानी खाता हो चुकी है।समय बहामूल्य है और इसकी बचत होती है।
प्राकृतिक आपदा या आपातकाल की स्तिथि में ऑनलाइन शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह विद्यालयों के लिए एक सुरक्षित विकल्प है। यह शिक्षा प्रणाली काफी सस्ती है। सबसे पहले तो यात्रा के पैसे बचते है उसके बाद पुस्तक भी कभी-कभी ऑनलाइन उपलब्ध हो जाती है जिसकी कीमत हार्ड कॉपी की तुलना में कम रहती है।
सुरक्षित तो यह प्रणाली है ही इसमे न शिक्षक को न विद्यार्थियों को घर से निकलना है पड़ता है। आधुनिक कोरोनॉ के समय यह निश्चय ही एक वरदान है। ऑनलाइन शिक्षा में संकोच के लिए कोई स्थान नहीं है। सामान्य रूप से देखा जाए तो कुछ विद्यार्थी कक्षा में प्रत्यक्ष रूप से शिक्षक के समक्ष संकोच के कारण सवाल नहीं कर पाते थे परंतु अब ऑनलाइन में वे निसंकोच होकर सवाल-जवाब कर पाते है।
ऑनलाइन शिक्षा के फायदे निःसंदेह बहुत अधिक है परंतु इसके कई नुकसान भी है। पहले तोह लगातार कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठने से बच्चों के आंखों पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसका श्रेय पहले ही मोबाइल और टेलेविज़न ने ले रखा है और अब दुरस्त शिक्षा प्रणाली इसे और भी बढ़ावा दे रही है। इसके अतिरिक्त जब बच्चे विद्यालय जाते थे तो वे अनुशाषित होते थे।
सर्वप्रथम समय पर विद्यालय पहुँचना, फिर प्राथना सभा में शामिल होना, व्यायाम योगा करना, फिर समय सारिणी के अनुरूप हर विषय को पढ़ना, निश्चित समय से भोजन करना इत्यादि परंतु ऑनलाइन शिक्षा ने बच्चों के अंदर के अनुशासन को समाप्त कर दिया है। बच्चों के सोने उठने का कोई निश्चित समय नही है। वे चालू कक्षा में भोजन ग्रहण करते हैं।
कैमरा बंद कर इधर उधर घूमते है क्योंकि उन्हें पता है शिक्षक उन्हें नही देख पा रहे हैं और बस हाजिरी के समय उपस्थित हो जाते हैं। और तो और अब न ही वे व्यायाम और न ही योगा करते है, इससे उनके शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। दूरस्थ शिक्षा में केवल किताबी शिक्षा ही दे पाना संभव है, इसमें शिक्षक बच्चों को सहपाठ्यकर्म का हिस्सा नही बना पाते उससे बच्चों का पूरा विकास संभव नही है।
हमे ऐसी खबरें आय दिन सुनने को मिलती है कि बच्चे शिक्षक की खिल्ली उड़ाते हैं क्योंकि उन्हें सजा पाने का कोई भय नही है।इससे बच्चों के मन मे बड़ो के प्रति आदर समाप्त होता नजर आ रहा है। गुरु का स्थान बजगवांसे ऊपर दिया गया है पर यदि बच्चे गुरु को अपमानित करेंगे तो बच्चों को उचित संस्कार देना असंभव हो जाएगा। लगातार इतनी देर कंप्यूटर के सामने बैठने से बच्चों के स्वभाव पर भी बुरा असर पड़ता है, वे अत्यधिक चिड़चिड़े और जिद्दी हो जाते हैं।
हमारा देश जहाँ आधी से ज्यादा जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे है हर व्यक्ति के लिए आने बच्चे को कंप्यूटर या मोबाइल खरीद कर देने की हैसियत नही है। पर बेचारा गरीब इंसान इस शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत पिसता जा रहा है। या तो वह अपने बच्चे को कही से भी कर्ज लेकर अथवा अपनी बची हुई पूंजी से मोबाइल अथवा कंप्यूटर खरीद कर दे या तो उसका बच्चा पढ़ाई से वंचित रह जाएगा। इतना ही नही मोबाइल खरीदने के पश्चात भी उसमे इंटरनेट की सुविधा भी प्राप्त करवानी पड़ेगी तभी उसका बच्चा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर पाएगा। और हमारे देश के कई गांव अभी भी इंटरनेट की सुविधा से वंचित है और कई गांव में इंटेटनेट तो है पर वह सिर्फ नाममात्र है,
असल मे इस इंटरनेट का होना न होना एक बराबर है। ऐसे स्थानों में रह रहे बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने में अत्यधिक कठनाईयों का सामना करना पड़ता है। कई बार तो दूरस्थ शिक्षा में आयोजित होने वाली परीक्षाओं में भी ये बच्चे भाग नही ले पाते क्योंकि इन्हें उचित रूप से इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नही होती।
हम सब इस बात से अनभिज्ञ नही है कि इंटेटनेट जितनी काम की वस्तु उतने ही इसके दुरुपयोग भी है। बच्चे जिनका मैन अत्यंत कोमल होता है और जिन्हें अपने सही गलत का अंदाज़ा नही होता ऐसे में वे अगर इनटरनेट का दुरुपयोग करने लगते है तो ये काफी चिंताजनक विषय हो जाता है। इस प्रकार ऑनलाइन शिक्षा के फायदे भी है और नुकसान भी। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग किस प्रकार करते है।
